देश की खबरें | कोविड-19 का टीका बाहर भेजने से पहले भारत में टीकाकरण तेज करें : आप

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल आम आदमी पार्टी (आप) ने देश में टीकाकरण अभियान तेज करने के स्थान पर कोविड-19 के टीके विदेशों में भेजने की केन्द्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इस दर से देश की पूरी आबादी के टीकाकरण में कम से कम 15 साल का समय लगेगा।

इस आरोप पर भाजपा ने जवाब दिया कि कोविड-19 रोधी टीके के निर्यात से भारत में टीकाकरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

आप के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में देश के लोगों को पहले टीके न देकर उसका ‘‘निर्यात’’ करने पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा, ‘‘टीके की खुराक 84 देशों को निर्यात की गईं। देश में लोगों को लगाए गए टीके से ज्यादा निर्यात किया गया है। हमें अपने देश के लोगों का ख्याल रखना चाहिए या दूसरे देश के लोगों की चिंता करनी चाहिए?’’

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार का टीका राष्ट्रवाद कहां चला गया है? आप कोविड-19 का टीका लगाने की दर में वृद्धि की मांग करती है ताकि प्रत्येक भारतीय को टीका लग सके।’’

आप नेता ने दावा किया कि अगर टीकाकरण वर्तमान दर से चलता रहा तो देश की पूरी आबादी के टीकाकरण में 15 साल लगेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस को नियंत्रित करने के लिए कम से कम 70 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण जरूरी है। अगर टीकाकरण अपनी वर्तमान दर से जारी रहा तो देश की 70 प्रतिशत आबादी को टीका लगाने में 10 साल लगेंगे, वहीं सभी के टीकाकरण में करीब 15 साल लगेंगे।’’

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि भारत द्वारा कोविड-19 रोधी टीके के निर्यात पर राघव चड्ढा का बयान, आम आदमी पार्टी की “तुच्छ मानसिकता का परिचायक” है।

उन्होंने कहा, “वह अब एक संवेदनशील मुद्दे पर उसी गंदी मानसिकता से बात कर रहे हैं जिससे वह घरेलू राजनीति करते हैं।”

कपूर ने कहा, “जिस प्रकार सरकार ने लॉकडाउन लगाकर फिर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में ढील दी उसी प्रकार भारतीय लोगों को चरणबद्ध तरीके से टीका लगाया जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “टीकाकरण के लिए योग्य 45 साल से अधिक के सभी नागरिकों के साथ देश की लगभग आधी आबादी को अगले एक महीने तक टीका लग जाएगा।”

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि चड्ढा को पता होना चाहिए कि देश की टीका उत्पादन क्षमता उसकी अपनी जरूरत से कई गुना अधिक है और निर्यात से देश के लोगों के टीकाकरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

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