देश की खबरें | उच्च न्यायालय से सपा नेता आजम खान को राहत, गिरफ्तारी पर रोक लगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामपुर जिले के गंज थाना में 2007 में दर्ज एक मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

प्रयागराज, तीन अप्रैल इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामपुर जिले के गंज थाना में 2007 में दर्ज एक मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने इस मामले में आजम खान की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, अफसर खान नाम के एक व्यक्ति ने 2007 में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि आजम खान के इशारे पर उसका घर ध्वस्त करा दिया गया था तथा पुलिस ने जांच के बाद 2007 में ही अंतिम रिपोर्ट दायर कर दी थी जो संबंधित अदालत के समक्ष लंबित है।

अफसर खान की 2017 में मृत्यु हो गई और उसके बेटे जुल्फिकार खान ने पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दायर की जिस पर रामपुर के विशेष न्यायाधीश (सांसद/विधायक) ने 21 जनवरी 2025 को इस मामले की आगे और जांच करने का आदेश पारित किया था।

आजम खान के वकील ने दलील दी कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की वजह से ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के 18 साल बाद यह विरोध याचिका दाखिल की गई। इस मामले में 10 जुलाई, 2007 को प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने जांच के बाद सात दिसंबर 2007 को याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की।

उन्होंने कहा कि अंतिम रिपोर्ट के आधार पर शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किए गए और इसके बाद यह मामला लंबित रहा और अंतिम रिपोर्ट पर कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

उनके मुताबिक, शिकायतकर्ता अफसर खान का 18 अक्टूबर 2017 को निधन हो गया जिसकी सूचना अदालत को 16 जनवरी 2023 को दी गई और आपत्ति दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया।

आजम खान के वकील ने बताया कि अफसर खान के पुत्र जुल्फिकार खान ने सात दिसंबर 2024 को विरोध याचिका दायर की जिस पर जुल्फिकार खान का पक्ष सुनने के बाद मामले में आगे और जांच करने का आदेश 21 जनवरी 2025 को पारित किया गया।

राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय देते हुए अदालत ने बुधवार को पारित अपने आदेश में अगली सुनवाई की तिथि पांच मई 2025 तय की और आदेश दिया कि तब तक याचिकाकर्ता को उक्त मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

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