नयी दिल्ली, सात जून कुछ राज्य सरकारों ने रियायती दरों पर खारी भूमि खरीदने में रुचि दिखाई है। एक अधिकारी ने बताया कि ये जमीनें केंद्र सरकार के स्वामित्व में हैं।
खारी भूमि से आशय ऐसी जमीन से है जो नमक के स्रोत रहे नदियों या तालाबों के सूखने से अस्तित्व में आती हैं। विभिन्न राज्यों में लगभग 60,000 एकड़ खारी जमीन उपलब्ध है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने राज्यों का नाम लिए बिना कहा कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने उनके आग्रह पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। यह भूमि इसी मंत्रालय के नियंत्रण में है।
अधिकारी ने कहा, “अभी तक कई राज्य सरकारों ने रुचि दिखाई है, जो चाहते हैं कि हम वह भूमि रियायती दरों पर बेच दें.. इस पर सचिवों की सक्रिय समिति है... मोलभाव के बाद हम ये प्रस्ताव वहां ले जाएंगे।”
खारी भूमि निर्माण परियोजनाओं और लॉजिस्टिक्स पार्कों के लिए उपयुक्त है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने पिछले वर्ष मई में नमक आयुक्त संगठन (एससीओ) में मूल्यांककों को पैनल में शामिल करने के लिए आवेदन मांगा था।
फिलहाल इस संबंध में दिशानिर्देश इस भूमि को निजी हाथों में बेचने की अनुमति नहीं देते हैं।
सूत्रों का कहना है कि निजी क्षेत्रों में बिक्री के लिए नीलामी के लिए नीति तैयार करने की भी योजना है।
खारी भूमि का हवाई सर्वेक्षण भी किया जा रहा है।
खारी भूमि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा के साथ-साथ राजस्थान में भी है।
जयपुर स्थित नमक आयुक्त कार्यालय डीपीआईआईटी के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
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