लद्दाख और उत्तर सिक्किम सेक्टर में भारतीय एवं चीनी सैनिकों के बीच झड़प, कई घायल
सूत्रों ने बताया कि पहली घटना में पांच मई देर शाम पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध अगली सुबह बातचीत के बाद समाप्त हुआ।
नयी दिल्ली, 10 मई भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख और दोनों देशों की सीमा से लगे सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास दो तीखी झड़पें हुईं हैं। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को दी।
सूत्रों ने बताया कि पहली घटना में पांच मई देर शाम पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध अगली सुबह बातचीत के बाद समाप्त हुआ।
उन्होंने बताया कि दोनों ओर से कई सैनिकों को मामूली चोटें आयीं। सूत्रों ने बताया कि इस घटना में करीब 200 कर्मी शामिल थे। झड़प के बाद दोनों पक्षों ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए।
दोनों देशों के सैनिकों के बीच इस तरह की घटना पैंगोंग झील के पास अगस्त 2017 में हुई थी। उसके बाद यह ऐसी पहली घटना है।
इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है कि इसमें भारत के कितने सैनिकों को चोटें आयी हैं।
सूत्रों ने बताया कि एक अन्य घटना में करीब 150 भारतीय और चीनी सैन्य कर्मियों के बीच नाकू ला दर्रे के पास झड़प हुयी जिसमें कम से कम 10 सैनिकों को चोटें आयीं।
सूत्रों ने बताया कि सैनिकों के बीच घूंसे चले।
सेना के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘सीमा की निगरानी करने वाले सैनिकों के बीच अस्थायी और अल्प अवधि की झड़प की घटनाएं होती हैं क्योंकि सीमाओं का समाधान नहीं हुआ है ... दोनों पक्षों द्वारा आक्रामक व्यवहार से सैनिकों को मामूली चोटें आईं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्थानीय स्तर पर बातचीत और संवाद के बाद सैनिकों को अलग किया गया। सैनिक स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप ऐसे मामलों को परस्पर रूप से सुलझा लेते हैं।’’
भारत और चीन के सैनिकों के बीच 2017 में डोकलाम ट्राई जंक्शन के पास 73 दिन तक गतिरोध कायम रहा था। उस घटना से दोनों परमाणु सम्पन्न देशों के बीच युद्ध की आशंकाएं भी उत्पन्न हो गई थीं।
भारत-चीन सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर है। चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है जबकि भारत इसका खंडन करता आया है। दोनों पक्षों का कहना है कि सीमा मुद्दे का हल होने तक सीमा क्षेत्रों में शांति बनाये रखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने डोकलाम गतिरोध के कुछ महीनों बाद अप्रैल 2018 में चीनी शहर वुहान में पहली अनौपचारिक वार्ता की थी।
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने निर्णय किया था कि वे अपनी सेनाओं को संचार मजबूत करने के लिए ‘‘रणनीतिक मार्गदर्शन’’ जारी करेंगे जिससे उनमें विश्वास और समझ का निर्माण हो सके।
मोदी और शी के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन पिछले साल अक्टूबर में चेन्नई के पास मामल्लापुरम में हुआ था जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने पर जोर दिया गया था।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 10, 2020 10:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

