देश की खबरें | सीतारमण ने एक साथ चुनाव के संबंध में झूठे दावों का खंडन किया
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चेन्नई, पांच अप्रैल केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘एक देश, एक चुनाव’ अवधारणा को लेकर किए जा रहे झूठे प्रचार को खारिज करते हुए शनिवार को स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में इसे लागू नहीं किया जाएगा।
उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान लगभग एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए और एक साथ चुनाव कराकर इतने बड़े खर्च को बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि संसद और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी। मूल्य के संदर्भ में अर्थव्यवस्था में 4.50 लाख करोड़ रुपये जुड़ेंगे। यह ‘एक देश एक चुनाव’ अवधारणा का स्पष्ट उदाहरण है।’’
सीतारमण ने कुछ पार्टियों पर ‘एक देश एक चुनाव’ पहल पर ‘‘झूठा अभियान चलाने’’ और इसका आंख मूंदकर विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साथ चुनाव 2034 के बाद ही कराए जाने की योजना है और तत्कालीन राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए अभी से आधार तैयार किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘इस अवधारणा के संबंध में कई मौकों पर व्यापक रूप से चर्चा हुई। यह ऐसी चीज नहीं है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू किया है। ‘एक देश एक चुनाव’ की अवधारणा 1960 के दशक तक अस्तित्व में थी। इसका आंख मूंदकर विरोध करने के बजाय, इसके लाभ को देखते हुए इसका समर्थन किया गया होता तो ‘एक देश एक चुनाव’ की अवधारणा देश को आगे ले जाती।’’
सीतारमण ने दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के दिवंगत संरक्षक एम करुणानिधि ने ‘एक देश एक चुनाव’ की अवधारणा का समर्थन किया था, लेकिन उनके बेटे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री (एम के स्टालिन) अपने पिता के नक्शेकदम पर नहीं चल रहे हैं और इसके बजाय इसका विरोध कर रहे हैं।
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