देश की खबरें | मंत्री को 'नकदी भरे बैग' संग दिखाने वाले वीडियो की एसआईटी जांच कराई जाए:शिवसेना (उबाठा) नेता अनिल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-उबाठा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अनिल परब ने उस वीडियो की जांच के लिए सोमवार को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन मांग की, जिसमें महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट एक कमरे में कथित तौर पर नोटों की गड्डियों से भरे बैग के साथ बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, जो आधा खुला हुआ है।

मुंबई, 14 जुलाई शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-उबाठा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अनिल परब ने उस वीडियो की जांच के लिए सोमवार को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन मांग की, जिसमें महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट एक कमरे में कथित तौर पर नोटों की गड्डियों से भरे बैग के साथ बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, जो आधा खुला हुआ है।

राज्य विधान परिषद में यह मुद्दा उठाते हुए परब ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "अगर मंत्री अपने बेडरूम में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता कैसे सुरक्षित रह सकती है?"

पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें शिरसाट एक कमरे में एक आधे खुले बैग के साथ बैठे नजर आ रहे थे, जिसके अंदर कथित तौर पर नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। हालांकि, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के नेता शिरसाट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बैग में सिर्फ कपड़े थे।

यह वीडियो उन खबरों के एक दिन बाद सामने आया था, जिनमें कहा गया था कि शिरसाट को अपनी घोषित संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि के संबंध में आयकर विभाग की जांच का सामना करना पड़ रहा है, जो 2019 में 3.3 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 35 करोड़ रुपये हो गई है।

शिरसाट और प्रतिद्वंद्वी शिवसेना पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए परब ने कहा, "एक मंत्री के बेडरूम का वीडियो सार्वजनिक हो गया है। मंत्री सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि उनके बेडरूम के वीडियो सार्वजनिक हो रहे हैं। लोगों की सुरक्षा का क्या?"

उन्होंने कहा कि जब मंत्री खुद सुरक्षित नहीं हैं, तब भी सरकार जन सुरक्षा विधेयक लेकर आई है।

परब ने कहा, "एक एसआईटी गठित की जानी चाहिए। वीडियो की जांच होनी चाहिए और उसे फोरेंसिक विभाग के पास भेजा जाना चाहिए। पहले मंत्रियों की सुरक्षा, फिर जनता की।"

उन्होंने मंत्रियों की सुरक्षा पर सदन में ढाई घंटे की चर्चा की भी मांग की।

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