देश की खबरें | शिरसाट ने उन्हें बिना बताये विभागीय अधिकारियों संग राज्य मंत्री के बैठक करने पर आपत्ति जतायी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री एवं शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने विभाग की राज्य मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता माधुरी मिसाल द्वारा उन्हें बिना बताए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करने पर आपत्ति जतायी है। वहीं मिसाल ने शिरसाट को जवाब देते हुए कहा कि ऐसा करना पूरी तरह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।

मुंबई, 26 जुलाई महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री एवं शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने विभाग की राज्य मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता माधुरी मिसाल द्वारा उन्हें बिना बताए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करने पर आपत्ति जतायी है। वहीं मिसाल ने शिरसाट को जवाब देते हुए कहा कि ऐसा करना पूरी तरह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।

बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री शिरसाट ने इस सप्ताह की शुरुआत में राज्य मंत्री मिसाल को एक पत्र लिखकर उनसे पूछा कि क्या वह भविष्य में अधिकारियों के साथ ऐसी बैठकें आयोजित करने की योजना बना रही हैं।

इस घटना से एक बार फिर सत्तारूढ़ सहयोगियों, खासकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भाजपा के बीच मतभेद सामने आ गए हैं।

शिरसाट ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘राज्य मंत्री, कैबिनेट मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री का एक पदानुक्रम होता है। इसलिए मैंने उनसे कहा है कि अगर ऐसी बैठकें आयोजित की जानी हैं, तो मुझे बताएं। (पत्र लिखने में) मेरा इरादा बिल्कुल स्पष्ट था कि कुछ ऐसे पहलू होते हैं जिन पर निर्णय लेना होता है, जो न तो राज्य मंत्री के अधिकार क्षेत्र में है और न ही मेरे।’’

वहीं मिसाल ने कहा कि वह पिछले सात-आठ महीनों से न केवल सामाजिक न्याय विभाग, बल्कि अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें बुधवार रात शिरसाट का पत्र मिला और उन्होंने जवाब में कहा कि अधिकारियों के साथ बैठकें करना उनके अधिकार क्षेत्र में है।

सामाजिक न्याय के अलावा, मिसाल शहरी विकास, परिवहन, चिकित्सा शिक्षा और अल्पसंख्यक विकास विभागों की भी राज्य मंत्री हैं।

मिसाल ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘मैं अन्य विभागों की भी राज्य मंत्री हूं। उपमुख्यमंत्री (एवं शहरी विकास मंत्री) एकनाथ शिंदे मुझे नगर निकायों से संबंधित ऐसी बैठकें आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं क्योंकि इससे व्यवस्था के कामकाज को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।’’

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