देश की खबरें | ‘साका पंजा साहिब’ शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान पहुंचा एसजीपीसी जत्था

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी 30 अक्टूबर को ‘शहीदी साका पंजा साहिब’ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को एक ‘जत्थे’ के साथ पाकिस्तान पहुंचे।

अमृतसर (पंजाब), 29 अक्टूबर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी 30 अक्टूबर को ‘शहीदी साका पंजा साहिब’ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को एक ‘जत्थे’ के साथ पाकिस्तान पहुंचे।

धामी ने पाकिस्तान में गुरुद्वारा पंजा साहिब के लिए एक ‘‘जत्थे’’ का नेतृत्व किया और उनके साथ आने वालों में स्वर्ण मंदिर के ‘ग्रंथी’ ज्ञानी गुरमिंदर सिंह, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के कार्यकारी सदस्य जरनैल सिंह और सरवन सिंह शामिल थे। इसमें ‘‘रागिस’’, ‘‘धादिस’’ और ‘‘कविशर’’ भी शामिल थे।

एसजीपीसी प्रमुख धामी ने कहा, ‘‘खालसा पंथ द्वारा शहीदी साका पंजा साहिब की शताब्दी पर इस नरसंहार के शहीदों को श्रद्धांजलि।’’ उन्होंने कहा कि अमृतसर में साका पंजा साहिब से संबंधित दो दिवसीय समागम के बाद अब पाकिस्तान के गुरुद्वारा पंजा साहिब में कार्यक्रम हो रहे हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) और एसजीपीसी संयुक्त रूप से कर रहा है।

एसजीपीसी के एक अधिकारी ने बताया कि इस बीच गुरुद्वारा पंजा साहिब में शताब्दी समागम शुरू हुआ और पाकिस्तान के हसन अब्दाल रेलवे स्टेशन पर ‘गुरमत समागम’ (धार्मिक मंडली) का आयोजन किया गया।

घटना 30 अक्टूबर, 1922 को पंजा साहिब के धार्मिक स्थल के पास हसन अब्दाल रेलवे स्टेशन पर हुई थी। पंजा साहिब के कई सिखों ने अमृतसर से अटक (अब पाकिस्तान में) सिख कैदियों को ले जा रही एक ट्रेन को रोकने के लिए रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध कर दिया था क्योंकि वे उन्हें (कैदियों को) खाना परोसना चाहते थे।

स्टेशन मास्टर ने जब ट्रेन रोकने से मना किया तो उनमें से कुछ पटरी के बीच में बैठ गए। चालक ने ट्रेन को रोक दिया लेकिन तब तक 11 सिख घायल हो गए थे। उनमें से दो ने बाद में दम तोड़ दिया, जिन्हें ‘‘साका पंजा साहिब’’ के शहीदों के रूप में सम्मानित किया गया।

पाकिस्तान रवाना होने से पहले एसजीपीसी प्रमुख धामी ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के लिए 41 सदस्यीय तदर्थ समिति के संबंध में हरियाणा सरकार की अधिसूचना को खारिज कर दिया और कहा कि यह ‘‘सिख मामलों में सीधे सरकारी हस्तक्षेप’’ है। धामी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एसजीपीसी ने पहले ही अपनी आशंका व्यक्त की थी कि सरकार एचएसजीएमसी के माध्यम से गुरुद्वारों के प्रबंधन को नियंत्रित करना चाहती है और हरियाणा की ताजा अधिसूचना इसकी पुष्टि करती है। मैं सिख संगत को आगाह करता हूं कि वे गुरुद्वारों को कब्जा करने की सरकार की मंशा का कड़ा विरोध करें।’’

धामी ने कहा, ‘‘हरियाणा सरकार ने अपनी अधिसूचना में अधिसूचित किया है कि 18 महीने के लिए 41 सदस्यीय तदर्थ समिति बनाने के अलावा यदि एचएसजीएमसी का चुनाव निर्धारित समय के भीतर नहीं होता है तो सरकार अगले 18 महीनों के लिए तदर्थ समिति का कार्यकाल बढ़ाएगी।’’

हरियाणा कैबिनेट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) संशोधन अध्यादेश-2022 लाने की मंजूरी दी थी। उच्चतम न्यायालय ने हाल में हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) अधिनियम, 2014 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जिसके तहत राज्य में गुरुद्वारों के मामलों के प्रबंधन के लिए एक अलग समिति का गठन किया गया था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now