जरुरी जानकारी | सेबी के नयूनतम सूचना पर जारी हाल के निर्देश में कई विसंगतियां: दामोदरन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. पूंजी बाजार नियामक सेबी के पूर्व चेयरमैन एम दामोदरन ने बुधवार को कहा कि न्यूनतम सूचना पर पूंजी बाजार नियामक सेबी के हाल के निर्देश में कई विसंगतियां हैं और यह ‘हास्यास्पद’ है।
मुंबई, पांच मार्च पूंजी बाजार नियामक सेबी के पूर्व चेयरमैन एम दामोदरन ने बुधवार को कहा कि न्यूनतम सूचना पर पूंजी बाजार नियामक सेबी के हाल के निर्देश में कई विसंगतियां हैं और यह ‘हास्यास्पद’ है।
दामोदरन ने यहां ‘इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनल ऑडिटर्स’ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आदेशात्मक व्यवस्थाएं होंगी तो हम कंपनियों में अच्छी संचालन व्यवस्था नहीं देख पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कि ऐसी चीजें भीतर से आती हैं।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि संबंधित पक्ष लेनदेन की मंजूरी के लिए ऑडिट समिति और शेयरधारकों द्वारा समीक्षा के लिए प्रदान की जाने वाली न्यूनतम जानकारी को लेकर उद्योग मानकों पर 14 फरवरी का निर्देश एक ‘बहुत विस्तृत’ दस्तावेज है।
पूर्व सेबी प्रमुख ने कहा, ‘‘यहां तक कि सारणीबद्ध बयान भी कई पेज लंबा है। इसमें इतनी सारी चीजें हैं कि यदि आप उन्हें गंभीरता से लेते हैं, तो आपको समस्या होगी। इसलिए उन्हें पढ़ना, उन पर हंसना और जीवन के साथ आगे बढ़ना बेहतर है।’’
दामोदरन ने कहा, ‘‘उस दस्तावेज में विसंगतियां हैं। उस दस्तावेज में उसी नियामक के अन्य नुस्खों के साथ विसंगतियां हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनियों को भी अच्छी संचालन व्यवस्था अपनाने में सुधार करने की जरूरत है।
दामोदरन ने कहा कि आज भी सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बहुत बड़ी कंपनियां हैं जो अब भी इस नियम का उल्लंघन कर रही हैं कि उनके बोर्ड में महिला स्वतंत्र निदेशक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनुपालन को व्यय की एक वस्तु के रूप में देखा जाता है, न कि एक निवेश के रूप में। जबकि यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि कंपनी लंबी अवधि में काम करती रहेगी।
दामोदरन ने स्वतंत्र निदेशकों के महत्व का जिक्र करते हुए सत्यम बोर्ड के मामले का हवाला दिया। उस कंपनी में प्रतिष्ठित स्वतंत्र निदेशक थे, जिन्होंने चर्चा के दौरान प्रासंगिक प्रश्न पूछने के बावजूद सभी दुर्भाग्यपूर्ण निर्णयों को सर्वसम्मति से पारित करने के लिए प्रवतर्क का पक्ष लिया।
दामोदरन ने कहा, ‘‘प्रवर्तक को खुद से बचाने के लिए आपको अपने निदेशक मंडल में अच्छे स्वतंत्र निदेशकों की जरूरत है। अगर कोई प्रवर्तक खुद को बचाना चाहता है, तो उसे बोर्ड में अच्छे लोगों को लाना होगा। अन्यथा, वह खुद को नष्ट कर लेगा। क्योंकि प्रलोभन कई हैं।’’
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