जरुरी जानकारी | ओडिशा में सात लाख भूमिहीन किसानों को मिलेगा 1,040 करोड़ रुपये का कर्ज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. ओडिशा सरकार ने भूमिहीन किसानों को कृषि ऋण देने के लिये एक योजना 'बलराम' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत कोरोना वायरस महामारी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे करीब सात लाख भूमिहीन किसानों को 1,040 करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाएगा। अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।

भुवनेश्वर, तीन जुलाई ओडिशा सरकार ने भूमिहीन किसानों को कृषि ऋण देने के लिये एक योजना 'बलराम' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत कोरोना वायरस महामारी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे करीब सात लाख भूमिहीन किसानों को 1,040 करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाएगा। अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।

राज्य के मुख्य सचिव ए के त्रिपाठी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया।

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कृषि और कृषक सशक्तीकरण विभाग के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि भूमिहीन किसान पहले कृषि ऋण लेने में सक्षम नहीं थे। अब उन्हें संयुक्त देयता समूहों के माध्यम से ऋण मिलेगा, जो 'सामाजिक गारंटी' के रूप में कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि यह योजना राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से तैयार की गयी है। उन्होंने कहा कि गांव के कृषि कार्यकर्ता इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू करेंगे।

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मुख्य सचिव ने अधिकारियों को विभिन्न स्तरों पर समन्वय और निगरानी के लिये एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र तैयार करने का भी निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, "कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए काश्तकारों को ऋण देना एक मजबूत कदम होगा।"

राज्य के वित्त सचिव ए के मीणा ने भूमिहीन किसानों और पट्टे पर खेती करने वालों को ऋण सहायता प्रदान करने के लिये अधिकारियों को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के माध्यम से बैंकिंग क्षेत्र तैयार करने के लिये कहा।

दो सरकारी संगठन कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) इस योजना के कार्यान्वयन के लिये क्रमशः राज्य और जिला स्तर पर नोडल एजेंसियां के रूप में काम करेंगे।

गर्ग ने कहा कि संयुक्त देयता समूहों के गठन के लिये एटीएमए के माध्यम से 'कृषक साथियों' तथा गांव के कृषि श्रमिकों को प्रोत्साहित करने, उन्हें बैंकों से जोड़ने, ऋण वितरण को बढ़ावा देने और ऋणों के पुनर्भुगतान को सुविधाजनक बनाने का भी निर्णय लिया गया।

गर्ग ने कहा, ‘‘प्रत्येक ऋणदाता एक वर्ष में कम से कम 10 संयुक्त देयता समूहों को वित्तपोषित करेंगे। प्रत्येक संयुक्त देयता समूहों में पांच सदस्य होंगे तथा हर समूह को 1.6 लाख रुपये दिये जायेंगे। इसके तहत दो साल में 1.40 लाख संयुक्त देयता समूहों के माध्यम से सात लाख भूमिहीन किसानों को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।’’

नाबार्ड के महाप्रबंधक ए चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘यह योजना देश में अपनी तरह की पहली योजना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से जमीनी स्तर पर कृषि श्रमिकों को लगभग 1,040 करोड़ रुपये का वित्त पोषण मिलेगा।’’

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