देश की खबरें | विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होगी : निजी विश्वविद्यालयों ने कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. देश के कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कहना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में अपना परिसर स्थापित करने से न केवल शीर्ष निजी विश्वविद्यालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौन बनेगा बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

नयी दिल्ली, नौ जनवरी देश के कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कहना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में अपना परिसर स्थापित करने से न केवल शीर्ष निजी विश्वविद्यालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौन बनेगा बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भारत में परिसर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूजीसी ने बृहस्पतिवार को इसका मसौदा नियमन जारी किया था। इसमें विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए जहां यूजीसी से मंजूरी लेनी होगी, वहीं दाखिला प्रक्रिया तथा शुल्क ढांचा तय करने की छूट होगी।

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष डा. अमन मित्तल ने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भारत में परिसर स्थापित करने से यहां शीर्ष निजी विश्वविद्यालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ भारत एक बड़ा देश है और काफी संख्या में छात्र यहां से उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के यहां परिसर स्थापित करने से परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इसके कारण इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी । हमने एयरलाइन, बैंकिंग, दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में देखा है, जहां काफी विदेशी कंपनियां आई। इसके बाद भारतीय संस्थानों एवं संगठनों ने अपना स्तर बढ़ाया।’’

मित्तल ने कहा कि कुल मिलाकर इससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होने से सभी को लाभ मिलेगा।

वहीं, जैन (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) बेंगलूरू के कुलपति डा. राज सिंह ने कहा, ‘‘ किसी भी विषय की बातें उसके ब्यौरे में छिपी होती है। मसौदा नियमन कई मुद्दों पर मौन है और अंतिम नियमन में इन विषयों पर और स्पष्टीकरण की जरूरत है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘ नयी परियोजनाओं में काफी निवेश की जरूरत होती है और इसे लम्बे समय तक बनाये भी रखना होगा। भारत में वर्तमान उच्च शिक्षण संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों के समक्ष कुछ चुनौतियां भी होंगी।’’

उन्होंने कहा कि इन विश्वविद्यालयों को मूल परिसर के समान शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने की जरूरत होगी और प्रारंभिक वर्षो में हो सकता है कि ऐसा करना संभव न हो सके।

दूसरी ओर, के एल (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) आंध्र प्रदेश के कुलपति डा. जी पार्थसारथी वर्मा का मानना है कि वर्तमान भारतीय विश्वविद्यालयों को लाभ होगा क्योंकि वे बाजार से परिचित हैं जबकि नये अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को इसे शुरू से बनाने का प्रयास करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम इसका सकारात्मक पहलू देख रहे हैं और इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के रूप में देख रहे हैं।’’

इस बारे में एचएलएम ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन्स, गाजियाबाद ने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालय को प्रतस्पर्धी के रूप में देखने की बजाए हमें इसे सेवा को बेहतर बनाने एवं छात्रों को पढ़ाई के लिये चुनाव के विकल्प देने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

दीपक

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