जरुरी जानकारी | सेबी ने सरकार को वोडाफोन आइडिया के शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश से छूट दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बृहस्पतिवार को सरकार को वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) के शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लाने से छूट दे दी। यह छूट वीआईएल में स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलने के एवज में 34 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के प्रस्तावित अधिग्रहण के बाद दी गई है।

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बृहस्पतिवार को सरकार को वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) के शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लाने से छूट दे दी। यह छूट वीआईएल में स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलने के एवज में 34 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के प्रस्तावित अधिग्रहण के बाद दी गई है।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने अपने आदेश में कहा, “भारत सरकार द्वारा वीआईएल में शेयरधारिता का अधिग्रहण व्यापक जनहित की रक्षा के एकमात्र उद्देश्य से प्रस्तावित है।”

इस परिवर्तन से कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी वर्तमान के 22.6 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हो जाएगी - जिससे प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाता वीआईएल अपने ग्राहक आधार को सेवा प्रदान करना जारी रख सकेगी तथा भारत में दूरसंचार पहुंच बढ़ा सकेगी।

यह छूट देते हुए सेबी ने कहा कि फिलहाल भारत सरकार का वीआईएल के प्रबंधन या बोर्ड में भाग लेने का कोई इरादा नहीं है और दूरसंचार कंपनी के नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा, ऐसी होल्डिंग को सार्वजनिक शेयरधारिता के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

पिछले महीने, सरकार ने संकटग्रस्त दूरसंचार कंपनी को एक जीवनरेखा प्रदान करते हुए सितंबर, 2021 के दूरसंचार सुधार पैकेज के प्रावधानों के तहत वीआईएल के स्पेक्ट्रम नीलामी बकाया के 36,950 करोड़ रुपये को इक्विटी में परिवर्तित करने का निर्णय लिया।

सामान्य तौर पर भारत सरकार की शेयरधारिता को बढ़ाकर 48.99 प्रतिशत करने से अधिग्रहण नियमों के तहत खुली पेशकश की बाध्यता उत्पन्न हो जाएगी, लेकिन नियामक ने सरकार को इससे छूट प्रदान की है।

नियमों के तहत, किसी सूचीबद्ध कंपनी में 25 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी हासिल करने वाली संस्थाओं को शेयरधारकों के लिए एक खुली पेशकश करनी होती है।

अपने आदेश में, नियामक ने उल्लेख किया कि वीआईएल द्वारा सरकार को एक बड़ी राशि का भुगतान किया जाना है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति पर संभावित बोझ डाल सकता है। इसके अलावा, भारत सरकार की ओर से एक खुली पेशकश की बाध्यता में नकदी की बड़ी मात्रा में निकासी शामिल है।

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