देश की खबरें | 'जोशीमठ बचाओ' संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री मोदी से पुनर्वास कार्य अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. 'जोशीमठ बचाओ' संघर्ष समिति ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भू-धंसाव से ग्रस्त नगर में उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों में जरूरी 'तत्परता और तेजी' के नदारद होने की शिकायत की और उनसे राहत, पुनर्वास और स्थिरीकरण के कार्य अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया।

जोशीमठ, 16 जनवरी 'जोशीमठ बचाओ' संघर्ष समिति ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भू-धंसाव से ग्रस्त नगर में उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों में जरूरी 'तत्परता और तेजी' के नदारद होने की शिकायत की और उनसे राहत, पुनर्वास और स्थिरीकरण के कार्य अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया।

जोशीमठ के उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजे अपने पत्र में संघर्ष समिति के संयोजक एवं पिछले डेढ़ साल से जोशीमठ के भू-धंसाव पीड़ितों की आवाज बने अतुल सती और संघर्ष समिति से जुड़े अन्य आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले तो 14 महीने से इस संकट को लेकर दी जा रही उनकी चेतावनियों को अनदेखा किया और अब जब संकट आया है, तो वह उससे कछुआ गति से निपट रही है।

संघर्ष समिति ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार जोशीमठ के राहत, पुनर्वास और स्थिरीकरण के काम को अपने हाथ में लेकर त्वरित गति से कार्यवाही करे ताकि लोगों का जीवन और हित सुरक्षित रहे।’’

बदरीनाथ के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भंडारी समेत संघर्ष समिति से जुड़े एक दर्जन से अधिक पदाधिकारियों के दस्तखत वाले पत्र में एनटीपीसी की 520 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड परियोजना को जोशीमठ संकट के लिए जिम्मेदार बताया गया है।

पत्र में उसे तत्काल बंद करने, जोशीमठ के अस्तित्व को संकट में डालने के लिए उस पर परियोजना लागत का दोगुना जुर्माना लगाने और 20 हजार करोड़ की इस राशि को इससे उजड़ने वाले लोगों में वितरित करने की मांग की गयी है।

समिति ने जोशीमठ के लोगों को घर के बदले घर, जमीन के बदले जमीन देते हुए नये व अत्याधुनिक जोशीमठ के समयबद्ध निर्माण के लिए संघर्ष समिति तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की भी मांग की है।

वर्ष 1962 में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय द्वारा सेना के लिए जोशीमठ के लोगों की अधिग्रहित जमीन के एवज में अब तक मुआवजा न दिए जाने का जिक्र करते हुए संघर्ष समिति ने कहा है कि भू-धंसाव में उनकी जमीनों का अस्तित्व समाप्त होने से पहले लोगों को उनका मुआवजा बाजार दर पर दे दिया जाए।

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