नयी दिल्ली, 17 मार्च विधि क्षेत्र की दो प्रमुख हस्तियों हरीश साल्वे और एपी शाह ने सोमवार को संसद की एक समिति के समक्ष एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर अलग-अलग विचार व्यक्त किया।
सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता साल्वे ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून संवैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करता है जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने कहा कि इस विधेयक को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
सूत्रों ने बताया कि विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष शाह ने कई बिंदुओं पर विधेयक को गलत ठहराया, जिसमें राज्य विधानसभा चुनावों को स्थगित करने की सिफारिश करने के लिए निर्वाचन आयोग को दी गई शक्ति भी शामिल है।
कुछ सांसदों ने कहा कि शाह ने दावा किया कि यह विधेयक संविधान, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और संघीय ढांचे का उल्लंघन है।
हालांकि, साल्वे ने उन तर्कों को खारिज कर दिया कि एकराष्ट्र-एक चुनाव संबंधी विधेयक संविधान की बुनियादी संरचना और संघीय सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि विधेयक लोगों के मतदान के अधिकार पर अंकुश नहीं लगाता है।
सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित कानूनों में से एक द्वारा प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन काफी हद तक संविधान की सीमा के भीतर हैं।
साल्वे और शाह दोनों से लगभग पांच घंटे की बैठक में भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति के सदस्यों ने अलग-अलग सवाल पूछे।
चौधरी ने बैठक को ‘सकारात्मक’ बताया।
उन्होंने बताया कि जहां साल्वे को करीब तीन घंटे लगे वहीं शाह का सत्र दो घंटे में समाप्त हुआ।
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