विदेश की खबरें | रूस ने चीन को एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति की

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मॉस्को, 29 अप्रैल रूस ने चीन को अत्याधुनिक एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति की है जिसमें “आश्चर्यजनक बातें” हैं। लेकिन चीन अब भी कुछ बातों को लेकर परेशान है। स्थानीय समाचार पोर्टल ‘एबीएन 24’ ने यह जानकारी दी।

रूसी ‘एस-400 ट्रायम्फ’ वायु रक्षा प्रणाली को अपनी श्रेणी में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों के तौर पर प्रतिष्ठा प्राप्त है। उसे उनकी अच्छी विशेषताओं और विभिन्न प्रकार के हवाई लक्ष्यों को रोकने की क्षमता के लिए जाना जाता है।

चीन ने 2014 में कई ‘एस-400 ट्रायम्फ’ खरीदने के लिए रूस के साथ अरबों डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।

कई वर्षों बाद, उस सौदे के बारे में रोचक विवरण सामने आए।

तब ‘एबीएन 24’ ने कहा कि इस सौदे ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया और इसे चीनी-रूसी सैन्य सहयोग का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना गया। इसे चीन द्वारा अपनी राष्ट्रीय वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी माना गया।

हालांकि, चीनी इंटरनेट सेवा सोहू के विश्लेषकों ने कहा है कि चीन को दिए गए एस-400 सिस्टम का आज शायद ही कहीं कोई उल्लेख है।

इसके अलावा, वे शायद ही कभी चीनी सेना की सार्वजनिक रिपोर्टों में दिखाई देते हैं, और उनकी तैनाती और उपयोग के बारे में वस्तुतः कोई खबर नहीं है।

इसके अलावा, चीनी सेना की सार्वजनिक रिपोर्टों में बमुश्किल इसकी चर्चा हैं और उनकी तैनाती और उपयोग के बारे में भी कोई खबर नहीं है।

चीनी पत्रकारों का कहना है कि चीन रूसी वायु रक्षा प्रणालियों पर बहुत अधिक निर्भर है। उन्हें एक शक्तिशाली चीनी वायु रक्षा प्रणाली बनाने की कुंजी माना जाता था क्योंकि ये प्रणालियां वास्तव में उत्कृष्ट हथियार हैं।

हालांकि चीनी पत्रकारों की बातों में एक तथ्य को ध्यान में नहीं लिया गया है। रूस ने एस -400 में कुछ आश्चर्यजनक बनाकर अपने हितों का ख्याल रखा है।

चीन का मानना है कि रूस ने चीन को अपने उपकरण का बहुत ही सामान्य संस्करण दिया है तथा कुछ उन्नत कार्यप्रणालियों (क्षमताओं) को रोक लिया है।

चीन इस बात से आश्चर्यचकित है कि ‘‘स्पष्टतः, एस-400 के निर्यात संस्करण प्रमुख प्रौद्योगिकियों तक सीमित हो सकते हैं।’’

चीनी पत्रकारों के अनुसार, रूस इस प्रकार अपने तकनीकी रहस्यों को नकल होने से बचा रहा है और विदेशी सेनाओं की अपने सशस्त्र बलों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को भी सीमित कर रहा है।

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