नयी दिल्ली, 19 दिसंबर संसद की सुरक्षा में चूक मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बयान दिए जाने और सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और हंगामे के बीच ही तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी देकर अंतत: उच्च सदन की बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
हंगामे के बीच ही वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने विनियोग (संख्याक तीन) विधेयक और विनियोग (संख्याक चार) विधेयक पेश किए। इनके जरिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 58,378 करोड़ रुपये के शुद्ध अतिरिक्त व्यय के लिए मंजूरी मांगी।
हंगामे के बीच ही उच्च सदन ने संक्षिप्त चर्चा के बाद दोनों विधेयक लौटा दिए। लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी है।
इसमें उर्वरक सब्सिडी के 13,351 करोड़ रुपये और खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के लगभग 7,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
राज्यसभा ने हंगामे के बीच ही एक और विधेयक पारित किया जिसमें दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
इससे पहले दिन में, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) अधिनियम, 2023 लोकसभा में संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित हो गया। निचले सदन में तीन सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
उच्च सदन में आठ सदस्यों ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लिया और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
राज्यसभा में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में शासन की जिम्मेदारी संभाले जाने से पहले दिल्ली में समस्याएं थीं और समस्याएं उपेक्षा के कारण थीं।
पुरी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा काम पूरा करने के लिए दो और साल मांगे जाने के बाद 2019 से केंद्र इस विधेयक पर चर्चा कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून 2019 में अस्तित्व में आया। 2020 की शुरुआत में, हम (कोविड-19) महामारी का सामना कर रहे थे और 2020 और 2021 के लिए महामारी में, लगभग कोई जमीनी स्तर का काम नहीं किया जा सका। इन अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 40 लाख लोग रहते हैं। यदि एक औसत परिवार में चार सदस्य हैं तो हमें लगभग आठ से 10 लाख परिवारों को पंजीकृत करना होगा। हम पहले ही चार लाख कर चुके हैं। हमें और अधिक करने की जरूरत है और हमें तेजी लाने की जरूरत है।’’
पुरी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों और देश के अन्य हिस्सों से लोग दिल्ली आ रहे हैं लेकिन पिछली सरकारों ने इस समस्या का समाधान नहीं किया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली का भूमि क्षेत्र नहीं बदला है, लेकिन जनसंख्या 1947 में सात-आठ लाख से बढ़कर वर्तमान में लगभग 2.5 करोड़ हो गई है।
पुरी ने कहा, ‘‘यह समस्या 20 साल पहले दिखाई दे रही थी और इस पर पहले भी ध्यान दिया जा सकता था लेकिन कांग्रेस सरकार 2006 में दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की कार्रवाई के कारण अनधिकृत कॉलोनियों को एक साल के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून लेकर आई।’’
उन्होंने कहा कि कानून को हर साल 2011 तक बढ़ाया गया था और उसके बाद, इसे तीन साल के लिए बढ़ाया गया तथा आज इसे फिर आगे बढ़ाया जा रहा है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्यों ने सदन में होने के बावजूद दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आप के सदस्यों के दिल में गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है।
गोयल ने कहा कि कांग्रेस और आप की गरीब विरोधी तथा पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता हर बार परिलक्षित होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक साथ हैं। यह घमंडिया... आईएनडीआई गठबंधन का असली चेहरा है।’’
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की नकल किए जाने और मजाक उड़ाए जाने का मुद्दा भी उठाया।
गोयल ने कहा कि पूरे जाट समुदाय ने राज्यसभा और उपराष्ट्रपति का अपमान करने वाले कृत्य की आलोचना की, लेकिन सदन में कांग्रेस के एक सदस्य ने इसकी निंदा नहीं की।
इससे पहले, राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण न तो शून्यकाल और न ही प्रश्नकाल हो सका। भोजनावकाश के बाद भी कई बार कार्यवाही बाधित हुई।
विपक्षी सदस्य संसद की सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे।
सदन में हंगामा जारी रहने पर धनखड़ ने कहा कि यहां एक खतरनाक उदाहरण पेश किया जा रहा है और वरिष्ठ सदस्य भी सदन में हंगामा कर रहे हैं।
इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और फिर शून्यकाल शुरू कराने की कोशिश की। इस दौरान कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले अपने-अपने मुद्दे उठाना चाह रहे थे। सभापति ने इसकी अनुमति नहीं दी।
इस दौरान सदन में मौजूद कुछ विपक्षी सदस्य ‘गृह मंत्री सदन में आओ, सदन में आकर जवाब दो’ जैसे नारे लगा रहे थे। कुछ विपक्षी सदस्य अपने साथियों का निलंबन वापस लेने की भी मांग कर रहे थे।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के कुछ सदस्य शाह के बयान की मांग पुन: करने लगे।
इसी दौरान सभापति धनखड़ ने एक वरिष्ठ सांसद द्वारा सदन के बाहर ‘असंसदीय’ आचरण किए जाने का उल्लेख किया और इसे अस्वीकार्य करार देते हुए गहरी आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कुछ देर पहले एक टीवी चैनल पर देखा... गिरावट की कोई हद नहीं है... एक बड़े नेता, एक सांसद के असंसदीय व्यवहार का वीडियो बना रहे थे... आपसे भी बहुत बड़े नेता हैं... मैं तो यही कह सकता हूं कि उन्हें सद्बुद्धि आए... कुछ तो सीमा होती होगी... कुछ जगह तो बख्शो।’’
धनखड़ ने कहा, ‘‘लेकिन कल्पना करिए, आपकी पार्टी का एक बड़ा नेता... वरिष्ठ नेता... एक दूसरी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य की वीडियोग्राफी कर रहा है। राज्यसभा के सभापति की मिमिक्री (नकल) कर रहा है, लोकसभा अध्यक्ष की मिमिक्री कर रहा है। कितनी गलत बात है... कितनी शर्मिंदगी भरी बात है। यह अस्वीकार्य है।’’
इसी दौरान कुछ विपक्षी सदस्य शाह के बयान की मांग करने लगे।
धनखड़ ने इसके बाद सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
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