ताजा खबरें | राजद ने महिला आरक्षण विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्यसभा में बृहस्पतिवार को महिला आरक्षण विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग करते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।

नयी दिल्ली, 21 सितंबर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्यसभा में बृहस्पतिवार को महिला आरक्षण विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग करते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां संशोधन) विधेयक, 2023’ पर उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए राजद के मनोज झा ने यह मांग की। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में कई क्षण ऐसे आते हैं जब ‘हां’ और ‘ना’ कहना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह विषय देश के इतिहास से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में संसद के केंद्रीय कक्ष में कहा था कि यदि कैनवास बड़ा होगा तो आकृति बड़ी होगी। राजद सदस्य ने दावा किया कि यहां (विधेयक में) कैनवास बड़ा है, किंतु आकृति छोटी है, जिसे इतिहास स्मरण रखेगा।

झा ने सरकार द्वारा इस विधेयक को कानून बनने के बाद ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नाम दिये जाने का जिक्र करते हुए कहा कि समझ में नहीं आता कि यह कोई कानून है या किसी धार्मिक ग्रन्थ का शीर्षक। उन्होंने कहा कि वह बचपन से सुनते आ रहे हैं कि ‘‘यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते...’’ किंतु देश में महिलाओं के साथ अत्याचार, घरेलू हिंसा और परिवार में उनके साथ होने वाले दुष्कर्म के मामले भी बड़ी संख्या में देखने को मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान अधिकार की बात करता है, किंतु अधिकार के साथ दया करने की बात नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग 2008 के अनुसार देश के (लोकसभा में) 412 सामान्य सीटें, 84 अनुसूचित जाति, 47 अनुसूचित जनजाति की सीटें हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अब हम इस विधेयक के माध्यम से क्या कर रहे हैं, 84 और 47 में से एक तिहाई (आरक्षित) कर रहे हैं। क्या यह अन्याय नहीं है?’’

झा ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी की महिलाएं अन्य महिलाओं की तुलना में कहीं अधिक वंचित और कमजोर होती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कोई नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पत्थर तोड़ने वाली एक महिला भगवती देवी को गया से संसद पहुंचाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उसके बाद भगवती देवी या फूलन देवी जैसी महिलाएं (संसद में) आ पायीं? उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाएं वापस इसलिए नहीं आ पाईं, क्योंकि हमारी व्यवस्थाएं संवेदन शून्य हैं।

राजद सदस्य ने मांग की कि इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजकर इसमें एससी, एसटी और ओबीसी को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम आज इसे नहीं करेंगे तो हम ऐतिहासिक गुनाहगार होंगे। बाहर लोग देख रहे हैं और वे हम सबसे पूछेंगे कि आपने यह क्या किया?’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप ओबीसी की बात करते हैं, किंतु यह आपकी चिंता में शामिल होने चाहिए। हम बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को माला भी पहनाएं और उनकी बातों को आत्मसात न करें। इस मामले में यह विरोधाभास नहीं होना चाहिए।’’

झा ने कहा कि संविधान बनने से बहुत पूर्व 1931 में बेगम शहनवाज और सरोजनी नायडू ने समान प्रतिनिधित्व की बात की थी। राजद सदस्य ने प्रश्न किया, ‘‘हम क्यों 33 प्रतिशत पर अटके पड़े हैं? मुझे समझ नहीं आ रहा कि 33 के साथ क्या रिश्ता है हमारा? यह 50 क्यों नहीं हो सकता, 55 क्यों नहीं हो सकता। आपका पूरा का पूरा वर्ग चरित्र बदल जाएगा।’’

उन्होंने समाज के सभी वर्गों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की वकालत करते हुए कहा कि नये संसद भवन में यह कैसा विधेयक लाया जा रहा है, जहां श्याम एवं श्वेत के अलावा अन्य रंगों की छटाएं क्यों नहीं हैं? उन्होंने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना है तो सभी को अधिकार मिलना चाहिए।

झा ने कहा कि जब से कल लोकसभा में यह विधेयक पारित किया गया है देश में इस बात की चर्चा हो रही है कि इसमें ओबीसी को अलग क्यों रखा गया है?

जनता दल (यू) के रामनाथ ठाकुर ने चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया का स्मरण किया और कहा कि उनके मन में महिलाओं को लेकर काफी पीड़ा थी। उन्होंने कहा कि जद (यू) के सांसदों ने संसद में कई बार जातीय जनगणना कराये जाने की मांग उठायी।

ठाकुर ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायत के मुखिया पदों पर 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान किया। उन्होंने कहा कि बिहार देश का अकेला ऐसा राज्य है जहां हर विभाग में 35 प्रतिशत महिलाएं हैं और पुलिस विभाग में सबसे अधिक महिलाएं हैं।

उन्होंने प्रश्न किया कि मोदी सरकार ने पिछले नौ सालों में महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया? उन्होंने कहा कि सरकार 2029 में महिलाओं को आरक्षण क्यों देना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के प्रति सरकार की नीयत ठीक नहीं है।

ठाकुर ने सरकार से अनुरोध किया कि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने का काम जल्द किया जाए।

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