देश की खबरें | मुल्तानी मामले में प्राथमिकी रद्द करने की पूर्व डीजीपी सैनी की याचिका पर पंजाब सरकार से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ 1991 के मामले में दर्ज नयी प्राथमिकी रद्द करने की उनकी याचिका पर बुधवार को राज्य सरकार से जवाब मांगा। यह मामला जूनियर इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी की 1991 में कथित हत्या से संबंधित है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ 1991 के मामले में दर्ज नयी प्राथमिकी रद्द करने की उनकी याचिका पर बुधवार को राज्य सरकार से जवाब मांगा। यह मामला जूनियर इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी की 1991 में कथित हत्या से संबंधित है।

पंजाब सरकार ने न्यायालय से कहा कि वह इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख पर बयान देगी।

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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस मामले को निरस्त करने या इसकी जांच सीबीआई को सौंपने के लिये सैनी की याचिका आठ सितंबर को खारिज कर दी थी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने पंजाब सरकार से कहा कि इस मामले में आगे कार्यवाही नहीं की जाये। पीठ ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर सैनी की याचिका पर जवाब मांगा है।

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इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान सैनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल पर गैरकानूनी और दुर्भावनापूर्ण तरीके से चलाये जा रहे मुकदमे को रोका जाना चाहिए क्योंकि इस प्रकरण में एक के बाद एक मामला दायर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वह 2018 में पंजाब के पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुये हैं और समस्या की जड़ यह है कि उन्होंने राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ पांच आपराधिक मामले दर्ज किये थे।

रोहतगी ने कहा, ‘‘मैं दिखाऊंगा कि इस मामले में सरकार कैसे प्रतिशोध ले रही है। मैं राज्य और इसके मुख्यमंत्री के खिलाफ लड़ रहा हूं।’’ उन्होंने कहा कि 1991 में चंडीगढ़ में एसएसपी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान याचिकाकर्ता की हत्या के लिये उस पर हमला हुआ था।

उन्होंने कहा कि इस हमले के बाद चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में प्राथमिकी दर्ज हुयी थी और दिसंबर, 1991 में बलवंत सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया गया था।

मुल्तानी के पिता का यह कहना है कि उसके बेटे को सैनी और दूसरे लोगों ने यातनायें दीं और तत्कालीन सरकार का कहना था कि मुल्तानी फरार हो गया और दुबारा कभी नहीं मिला।

इस मामले का ब्योरा देते हुये रोहतगी ने कहा कि 1991 से मुल्तानी कभी नजर नहीं आया और जब उसके पिता ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की तो सरकार ने कहा कि मुल्तानी हिरासत से फरार हो गया था।

रोहतगी ने कहा कि इस साल मई में मुल्तानी के भाई की शिकायत पर यह प्राथमिकी दर्ज की गयी क्योंकि उसके पिता की 2014 में मृत्यु हो गयी थी।

रोहतगी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया और कहा कि पंजाब सरकार का इस मामले में कोई अधिकार नहीं है क्योंकि कथित यातना 1991 में चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में हुयी थी, जो केन्द्र शासित क्षेत्र है।

पीठ ने कहा कि वह इस मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर रही है और उसने राज्य सरकार की ओर से पेश गोपाल सुब्रह्मण्यम से जानना चाहा कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिये कितना समय चाहिए।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि उन्हें कम से कम तीन सप्ताह का समय चाहिए। इस पर पीठ ने इस मामले को इसके बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

पीठ ने सुब्रह्मण्यम से कहा, ‘‘ऐसे मामले में जल्दबाजी मत कीजिये, जो समस्या पैदा कर सकती है। चूंकि, पिछले एक महीने से इसमें कार्यवाही नहीं हुयी है, इसलिए आगे कार्यवाही मत कीजिये। आप उच्च न्यायालय से अपनी नयी याचिका वापस ले लीजिये।’’

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर इस संबंध में वक्तव्य देंगे।

शीर्ष अदालत ने 15 सितंबर को सैनी को इस मामले में अंतरिम संरक्षण प्रदान कर दिया था।

अनूप

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