जरुरी जानकारी | रिजर्व बैंक समिति ने लेनदेन में क्यूआर कोड इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. अर्थव्यवस्था में नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिये सरकार को ग्राहकों के बीच क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहन देने चाहिये। रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह कहा गया है।

मुंबई, 22 जुलाई अर्थव्यवस्था में नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिये सरकार को ग्राहकों के बीच क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहन देने चाहिये। रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह कहा गया है।

क्यूआर कोड के जरिये विभिन्न बिक्री केन्द्रों और दुकानों पर मोबाइल से आसानी से भुगतान किया जा सकता है। क्यूआर कोड पर्याप्त सूचनाओं को अपने में संग्रहित रख सकता हे। यह एक तरह का बारकोड होता है जिसे मशीन के जरिये पढ़ लिया जाता है।

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एक जापानी कंपनी ‘डेंसो वेव’ ने1990 में क्यूआर कोड का अविष्कार किया था। भारत में क्यूआर कोड भुगतान प्रणाली व्यापक तौर पर तीन तरह से -- भारत क्यूआर, यूपीआई क्यूआर और प्राप्रिएटरी क्यूआर-- के जरिये काम करती है।

आईआईटी बंबई के प्रोफेसर एमरिटस डी बी पाठक की अध्यक्षता वाली रिजर्व बैंक की इस समिति ने और भी कई सुझाव इस संबंध में दिये हैं। उसने कहा है कि जो व्यापारी अलेक्ट्रानिक तरीके से भुगतान स्वीकार करते हैं उन्हें कर प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिये।

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क्यूआर कोड के विश्लेषण के लिये गठित इस समिति ने कहा है कि देश में क्यूआर कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये और इसे लोगों के बीच आकर्षक बनाने के लिये सरकार को प्रोत्साहन योजनाओं को भी शुरू करना चाहिये।

क्यूआर कोर्ड के जरिये कोई भी बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, किराना सामान, यात्रा और अन्य कई तरह के भुगतान कर सकता है। रिजर्व बैंक को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कागज आधारित क्यूआर कोड काफी सस्ता और लागत प्रभावी है। इसमें रखरखाव की भी जरूरत नहीं पड़ती है।

रिजर्व बैंक ने इस रिपोर्ट पर लोगों तथा अन्य संबंध पक्षों से 10 अगस्त तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने को कहा है।

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