ताजा खबरें | लोकसभा में शोर-शराबे के बीच ‘अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक’ पेश

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. लोकसभा में शुक्रवार को ‘अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक, 2023’ पेश किया गया जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को वित्त पोषित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिष्ठान स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

नयी दिल्ली, चार अगस्त लोकसभा में शुक्रवार को ‘अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक, 2023’ पेश किया गया जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को वित्त पोषित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिष्ठान स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

निचले सदन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेन्द्र सिंह ने ‘अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक, 2023’ पेश किया। विधेयक पेश किये जाने के दौरान विपक्षी दलों के सदस्य मणिपुर के मुद्दे पर अपनी मांगों को लेकर शोर-शराबा कर रहे थे।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि यह विधेयक अनुसंधान और विकास, वैज्ञानिक खोजों, नई प्रौद्योगिकियों और अभिनव अनुप्रयोगों की आधारशिला है। प्रतिस्पर्धा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की सफलता और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों में चुनौतियों और अवसरों का समाधान करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसमें कहा गया है कि विज्ञान के सभी क्षेत्रों में एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का विकास आवश्यक है। इसमें गणितीय विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और कृषि के साथ ही मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक और तकनीकी आयाम सम्मिलित हैं।

इसके अनुसार, विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड अधिनियम 2008 में अब तक ऐसे अनुसंधान में लगे व्यक्तियों को वित्तीय सहायता के माध्यम से विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अच्छा अवसर प्रदान किया गया। फिर भी विज्ञान अधिनियम के माध्यम से गठित विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड का पैमाना और क्षेत्र सीमित रहा।

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में निर्णायक बदलाव लाने में सक्षम अनुसंधान और नवाचार के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण के जरिये एकीकृत योजना और समन्वय की आवश्यकता है। हमारे देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित मानव संसाधनों का एक विशाल समूह है जिनमें से कई लोग भारत के बाहर के विश्वविद्यालय और संस्थाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान के अवसर तलाश सकते हैं।

इसका मकसद वित्तीय रूप से व्यावहारिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करने के लिए निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों का दोहन करना भी है। प्रस्तावित नए विधान का उद्देश्य वैज्ञानिक खोज के लिए भारत के राष्ट्रीय अनुसंधान और ज्ञान उद्यमिता और नवाचार क्षमता को बढ़ाना है।

इसमें कहा गया है कि ‘अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान विधेयक 2023’ का मकसद एक बहुत ही जीवंत एवं विश्वस्तरीय सक्षम वैज्ञानिक पारिस्थितिक तंत्र का सृजन करना है।

विधेयक के उपबंध 3 और 4 में अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान की स्थापना का उपबंध किया गया है।

विधेयक में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले प्रतिष्ठान के प्रशासनिक बोर्ड की संरचना का भी उल्लेख किया गया है।

इसमें वित्तीय कोष के गठन की बात भी कही गई है जिसमें निजी क्षेत्र का भी योगदान होगा।

राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के संचालक मंडल में प्रतिष्ठित शोधार्थी और पेशेवर शामिल होने की बात कही गई है।

दीपक

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