देश की खबरें | रेरा की कार्यप्रणाली निराशाजनक: उच्चतम न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के कामकाज की आलोचना करते हुए इसे ‘निराशाजनक’ करार दिया।

नयी दिल्ली, चार मार्च उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के कामकाज की आलोचना करते हुए इसे ‘निराशाजनक’ करार दिया।

निजी बिल्डरों से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने बताया कि रेरा कानून वास्तव में अपने क्रियान्वयन में विफल रहा है।

उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रभावित करने वाले ‘डोमिनो प्रभाव’ की ओर इशारा किया और कहा कि यदि किसी बिल्डर की एक परियोजना विफल होती है, तो उसकी अन्य परियोजनाएं भी विफल हो जाती हैं और अदालतें विफल परियोजना से संबंधित मामलों पर फैसला नहीं कर सकती हैं।

‘माहिरा होम्स वेलफेयर एसोसिएशन’ से संबंधित मामले में पेश हुए परमेश्वर ने कहा कि यदि परियोजना विफल होती है, तो यह विभिन्न हितधारकों को प्रभावित करती है। उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नियामक तंत्र को मजबूत करने में अदालत के हस्तक्षेप की मांग की।

न्यायमूर्ति कांत ने परमेश्वर की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि रेरा के तहत विनियामक प्राधिकरण का कामकाज निराशाजनक है, लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य नए विनियामक उपायों का विरोध कर सकता है।

भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 को संसद द्वारा रियल एस्टेट क्षेत्र को विनियमित करने और आवास परियोजनाओं में निवेश करने वाले घर खरीदारों के पैसे की रक्षा के लिए अधिनियमित किया गया था।

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