विदेश की खबरें | दमनकारी बेलारूस रूस की निजी सेना के विद्रोही प्रमुख के लिए उचित स्थान नहीं होगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. बगावत के बाद एक कथित समझौता हुआ है जिसके तहत प्रीगोझिन को बेलारूस में निर्वासन में रहना होगा। यह एक ऐसा देश है जहां बागी तेवर उनके अपने वतन (रूस) से भी ज्यादा अस्वीकार्य हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

बगावत के बाद एक कथित समझौता हुआ है जिसके तहत प्रीगोझिन को बेलारूस में निर्वासन में रहना होगा। यह एक ऐसा देश है जहां बागी तेवर उनके अपने वतन (रूस) से भी ज्यादा अस्वीकार्य हैं।

प्रीगोझिन रविवार को अस्वाभाविक रूप से शांत रहे जबकि उनकी निजी सेना के बल रूस के शहरों से हट गए। इससे पहले क्रेमलिन (रूस का राष्ट्रपति भवन) ने ऐलान किया था कि प्रीगोझिन बेलारूस जाने के लिए राज़ी हो गए हैं लेकिन यह अब तक साफ नहीं है कि वह असल में हैं कहां?

बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने कथित रूप से यह समझौता कराया है। मगर प्रीगोझिन का विद्रोही रवैया, लुकाशेंके की कार्य पद्धति के प्रतिकूल है जो असंतोष और स्वतंत्र मीडिया का बुरी तरह से दमन करते हैं।

वह 1994 से सत्ता में हैं और उन्हें अक्सर ‘ यूरोप का आखिरी तानाशाह’ कहा जाता है। लुकाशेंको ने 2020 में उनके शासन के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को बुरी तरह से कुचल दिया था और सैंकड़ों लोगों को लंबे वक्त तक जेल में रखा गया जिनमें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित एलेस बियालियात्स्की भी शामिल हैं।

प्रीगोझिन का रवैया विद्रोही था और उनके लड़ाके शनिवार को तेज़ी से मॉस्को की ओर बढ़े। प्रीगोझिन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सीधे तौर पर आलोचना नहीं की और दावा किया कि उनका मकसद रूस के रक्षा प्रतिष्ठान को बेदखल करना है।

समझौते के तहत प्रीगोझिन का नियंत्रण ‘वैग्नर’ से खत्म कर दिया है लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि उनके लड़ाके उनके साथ बेलारूस जाएंगे या नहीं।

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