देश की खबरें | बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों का हिंदुओं पर अत्याचार चिंता का विषय: आरएसएस

बेंगलुरु, 22 मार्च राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों द्वारा हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित रूप से सुनियोजित हिंसा, अन्याय और उत्पीड़न को लेकर शनिवार को गंभीर चिंता व्यक्त की।

आरएसएस के शीर्ष निर्णायक मंडल अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की बैठक के दूसरे दिन बांग्लादेश के संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया।

आरएसएस ने कहा कि हिंदुओं पर अत्याचार मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों के हाथों हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर लगातार और सुनियोजित तरीके से हो रही हिंसा, अन्याय और उत्पीड़न को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करती है।’’

इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश में हाल में हुए शासन परिवर्तन के दौरान मठों, मंदिरों, दुर्गापूजा पंडालों और शैक्षणिक संस्थानों पर हमले, देवी-देवताओं की मूर्तियों का अपमान करने, बर्बर हत्याएं, संपत्तियों की लूट, महिलाओं के अपहरण और छेड़छाड़ तथा जबरन धर्मांतरण की कई घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

एबीपीएस ने कहा, ‘‘इन घटनाओं को केवल राजनीतिक बताकर इनके धार्मिक पहलू को नकारना सत्य को नकारना जैसा है, क्योंकि ऐसी घटनाओं के पीड़ित लोग बड़ी संख्या में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से ही आते हैं।’’

प्रस्ताव में कहा गया है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार कोई नयी बात नहीं है।

एबीपीएस ने कहा, ‘‘बांग्लादेश में हिंदू आबादी में लगातार गिरावट (1951 में 22 प्रतिशत से आज 7.95 प्रतिशत तक) उनके लिए अस्तित्व के संकट को दर्शाती है।’’

प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले वर्ष हुई हिंसा और घृणा को सरकारी और संस्थागत समर्थन मिलना गंभीर चिंता का विषय है।

एबीपीएस ने बांग्लादेश को आगाह किया कि लगातार ‘भारत विरोधी बयानबाजी’ दोनों देशों के बीच संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।

आरएसएस ने कहा, ‘‘कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें एक देश को दूसरे के खिलाफ खड़ा करके अविश्वास और टकराव का माहौल बनाकर भारत के आसपास के पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का एक ठोस प्रयास कर रही हैं।’’

एबीपीएस ने विचारकों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विद्वानों से भारत विरोधी माहौल और पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखने और इन्हें बेनकाब करने का आह्वान किया।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस तथ्य को रेखांकित करना चाहती है कि पूरे क्षेत्र की एक साझा संस्कृति, इतिहास और सामाजिक बंधन है, जिसके कारण किसी भी स्थान पर होने वाली उथल-पुथल पूरे क्षेत्र में चिंता का विषय बन जाती है। एबीपीएस का मानना ​​है कि सभी जागरूक लोगों को भारत और पड़ोसी देशों की इस साझा विरासत को मजबूत करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।’’

इसमें कहा गया है कि इस दौरान उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि बांग्लादेश में हिन्दू समाज ने इन अत्याचारों का शांतिपूर्ण, सामूहिक और लोकतांत्रिक तरीके से साहसपूर्वक प्रतिरोध किया है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि यह सराहनीय है कि इस संकल्प को भारत के हिंदू समाज से नैतिक और मनोवैज्ञानिक समर्थन मिला।

एबीपीएस ने कहा कि भारत और विभिन्न देशों में विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस हिंसा के खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त की और विरोध प्रदर्शनों के जरिये बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा और सम्मान की मांग की।

इसने कहा कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई नेताओं ने भी अपने स्तर पर उठाया है।

आरएसएस ने कहा कि भारत सरकार ने बांग्लादेश के हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ खड़े होने और उनकी सुरक्षा की आवश्यकता पर अपना संकल्प व्यक्त किया है।

इसने कहा कि भारत सरकार ने इस मुद्दे को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ-साथ कई वैश्विक मंचों पर भी उठाया है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा भारत सरकार से आग्रह करती है कि वह बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा, सम्मान और भलाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करे तथा बांग्लादेश सरकार के साथ निरंतर और सार्थक बातचीत करे।’’

एबीपीएस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैश्विक समुदाय का यह दायित्व है कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार को गंभीरता से लें और बांग्लादेश सरकार पर इन हिंसक गतिविधियों को रोकने के लिए दबाव डालें।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘एबीपीएस हिंदू समुदाय और विभिन्न देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेताओं से भी बांग्लादेश के हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ एकजुटता दिखाने का आह्वान करती है।’’

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