जरुरी जानकारी | मार्च तक महामारी-पूर्व के स्तर को पार कर जाएगी रेपो दर : विश्लेषक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मुद्रास्फीति पर काबू के लिए रिजर्व बैंक की आक्रामक टिप्पणी को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष में नीतिगत दर रेपो में और बढ़ोतरी करेगा। मार्च तक रेपो दर महामारी-पूर्व के स्तर से अधिक होगी।

मुंबई, आठ जून मुद्रास्फीति पर काबू के लिए रिजर्व बैंक की आक्रामक टिप्पणी को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष में नीतिगत दर रेपो में और बढ़ोतरी करेगा। मार्च तक रेपो दर महामारी-पूर्व के स्तर से अधिक होगी।

इससे पहले दिन में रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को 0.50 प्रतिशत बढ़ाकर 4.90 प्रतिशत कर दिया। हालांकि, एमपीसी ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में बदलाव नहीं किया है और उसका मुख्य ध्यान मुद्रास्फीति के प्रबंधन पर रहा है।

रिजर्व बैंक ने इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को एक प्रतिशत बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है।

एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक घोषणा को आक्रामक करार दिया। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक इस समय मुद्रास्फीति को लेकर अधिक चिंतित है। इसका संकेत मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाए जाने से मिलता है।

बरुआ ने कहा कि मुद्रास्फीति को लेकर रिजर्व बैंक की चिंता को देखते हुए लगता है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक नीतिगत दर रेपो महामारी-पूर्व के स्तर से अधिक यानी छह प्रतिशत के पास होगी।

उन्होंने सीआरआर में बढ़ोतरी नहीं होने की वजह से बांड पर प्राप्ति बढ़ने की उम्मीद भी जताई।

इसी तरह की राय जताते हुए इंडिया रेटिंग्स के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि नीतिगत दरों में वृद्धि उम्मीद के अनुरूप है। लेकिन एमपीसी ने यह भी कहा है कि वह प्रोत्साहनों को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करेगी। इससे पहले चार मई को केंद्रीय बैंक ने बिना पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि की थी।

सिन्हा ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस साल के दौरान रेपो दर में चौथाई से आधा प्रतिशत की और वृद्धि कर सकता है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने भी कहा कि नीतिगत दरें अभी और बढ़ेंगी। नायर ने कहा, ‘‘अगली दो मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में 0.35 और 0.25 प्रतिशत की और वृद्धि हो सकती है।’

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख से संकेत मिलता है कि वृद्धि प्रक्रिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती मुद्रास्फीति है। हालांकि, वृद्धि स्थिर रहेगी लेकिन मुद्रास्फीति का जल्द हल निकालना जरूरी है।

बार्कलेज इंडिया के राहुल बजोरिया ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाने तथा वृद्धि के अनुमान को कायम रखने से केंद्रीय बैंक की निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में मुद्रास्फीति को रखने की मंशा का संकेत मिलता है। ब्रोकरेज कंपनी का अनुमान है कि दिसंबर तक नीतिगत दर 5.75 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। पहले इसके 5.15 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया था।

क्रिसिल ने एक नोट में कहा है कि रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष में रेपो दर में 0.75 प्रतिशत की और बढ़ोतरी करेगा। रेपो दर महामारी-पूर्व के स्तर से 0.50 प्रतिशत अधिक तक पहुंच सकती है। क्रिसिल ने कहा कि इससे चालू वित्त वर्ष में वृद्धि पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि मौद्रिक नीति का प्रभाव बाद में दिखता है।

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