देश की खबरें | विपक्षी दलों की बैठक में आरक्षण की ऊपरी सीमा हटाने, जातिगत सर्वेक्षण पर चर्चा हुई :शरद पवार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने जालना जिले की अंबड तालुका में एक दिन पहले पुलिस कार्रवाई में घायल हुए मराठा ‘कोटा’ आंदोलनकारियों से शनिवार को मुलाकात की और आरक्षण पर लागू 50 प्रतिशत की ऊपरी सीमा हटाने की मांग की।
जालना(महाराष्ट्र), दो सितंबर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने जालना जिले की अंबड तालुका में एक दिन पहले पुलिस कार्रवाई में घायल हुए मराठा ‘कोटा’ आंदोलनकारियों से शनिवार को मुलाकात की और आरक्षण पर लागू 50 प्रतिशत की ऊपरी सीमा हटाने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘जातिगत सर्वेक्षण’, और आरक्षण की ऊपरी सीमा हटाने पर बृहस्पतिवार और शुक्रवार को हुई विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में चर्चा हुई।
पवार ने कहा कि आंदोलनकारियों ने उन्हें बताया कि उच्च पद पर आसीन एक व्यक्ति का फोन आने पर धुले-सोलापुर मार्ग पर अंतरवाली सराटी में प्रदर्शन स्थल पर पुलिस का रवैया बदल गया।
शुक्रवार को पुलिस ने वहां एक हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति को वहां मौजूद लोगों द्वारा कथित तौर पर अस्पताल नहीं ले जाने देने के कारण पुलिस ने यह कार्रवाई की थी।
यहां भड़की हिंसा के दौरान करीब 40 पुलिसकर्मी और कई प्रदर्शनकारी घायल हुए तथा इस दौरान कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। अप्रिय घटनाओं में कथित संलिप्तता को लेकर 350 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
राकांपा प्रमुख ने यहां दोपहर में एक स्थानीय अस्पताल में घायलों से बात करते हुए कहा कि मराठा समुदाय के लिए नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण मांग रहे लोगों को ऐसा शांतिपूर्वक करना चाहिए, संयम बरतना चाहिए और वे शांति बनाये रखें।
पवार ने उन्हें अपने समर्थन का आश्वासन दिया, और शुक्रवार की पुलिस कार्रवाई स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठे कई आंदोलनकारियों से भी मुलाकात की।
घायलों से मिलने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए राकांपा प्रमुख ने कहा कि (50 प्रतिशत की ऊपरी सीमा हटाने और जातिगत सर्वेक्षण के) मुद्दों पर (विपक्षी गठबंधन) की बैठक में चर्चा हुई, लेकिन अंतिम फैसले पर नहीं पहुंचा जा सका।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हम इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे।’’
उन्होंने घटना के लिए राज्य के गृह विभाग को जिम्मेदार ठहराया और पुलिस कार्रवाई को अमानवीय करार दिया।
पवार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों ने मुझसे कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण था और स्थानीय प्रशासन के साथ चर्चा जारी थी। प्रदर्शनकारी गृह मंत्री (और उपमुख्यमंत्री) देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने मुझे बताया कि पुलिस को एक उच्च पदस्थ व्यक्ति का फोन आया और फिर उसका रवैया बदल गया।’’
उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को कांग्रेस-राकांपा सरकार ने आरक्षण दिया था लेकिन यह कानूनी जांच को पार नहीं कर सका।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे) से हस्तक्षेप करने और समाधान तलाशने की मांग करता हूं।’’
पवार ने कहा, ‘‘जब मैं मुख्यमंत्री था...नागपुर में एक भगदड़ मची थी और कुछ आदिवासी मारे गये थे। (तब) आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मंत्री मधुकर पिचाड ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था।’’
पवार ने कहा कि यहां तक कि 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमले के बाद अपनी टिप्पणी को लेकर विवाद छिड़ने के बाद गृह मंत्री आर आर पाटिल ने इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा सरकार को सीखना चाहिए कि प्रशासन कैसे काम करता है।’’
पवार ने कहा कि जालना घटना ऐसे दिन हुई, जब सात राज्यों के मुख्यमंत्री, पांच राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री और शीर्ष राष्ट्रीय नेता मुंबई में (विपक्षी गठबंधन की) बैठक में शरीक होने के लिए आए हुए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों का कहना है कि घटना का लक्ष्य विपक्षी गठबंधन की बैठक से ध्यान भटकाना था।’’
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