देश की खबरें | ओडिशा में भार्गवी नदी के किनारे प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पुरातात्विक स्मारकों को सूचीबद्ध करने का काम करने वाले शोध समूह की एक टीम ने दावा किया कि उन्होंने ओडिशा के पुरी जिले में एक प्राचीन मंदिर के अवशेष की तलाश की है, जो संभवत: 13वीं-14वी शताब्दी का है।
भुवनेश्वर, 19 अगस्त पुरातात्विक स्मारकों को सूचीबद्ध करने का काम करने वाले शोध समूह की एक टीम ने दावा किया कि उन्होंने ओडिशा के पुरी जिले में एक प्राचीन मंदिर के अवशेष की तलाश की है, जो संभवत: 13वीं-14वी शताब्दी का है।
रीडिस्कवर लॉस्ट हैरिटेज टीम के चार सदस्यों ने पुरी शहर से 31 किलोमीटर दूर बलंगा इलाके में भार्गवी नदी के मुहाने के समीप खंडहर का पता लगाया। यह टीम अभी रत्नाचिरा घाटी के पुरातात्विक स्मारकों को सूचीबद्ध करने का काम कर रही है।
इस शोध परियोजना के समन्वयक दीपक नायक ने बताया कि प्राचीन मंदिर के अवशेष नदी के किनारे बिखरे हुए मिले हैं। नायक ने एक विज्ञप्ति में बताया कि मंदिर की वस्तुओं को देखते हुए यह 13वीं-14वीं शताब्दी या उससे भी पहले का प्रतीत होता है।
मंदिर के कई हिस्सों को ग्रामीण निर्माण के लिए उठा ले गए। वहीं नदी के मुहाने तक क़रीब दो दर्जन प्राचीन नक्काशीदार खंड हैं।
टीम का नेतृत्व कर रहे अनिल धीर ने बताया कि रत्नाचिरा घाटी पुरातात्विक आश्चर्यों से भरी है और इनमें से ज़्यादातर अज्ञात हैं क्योंकि इन्हें दर्ज करने का कार्य नहीं हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम ने देवी सीता की प्यास बुझाने के लिए उनकी मोती की अंगूठी से नदी के बहाव की दिशा बदल दी थी। यह प्राचीन नदी साल के ज़्यादातर समय सूखी ही रहती है ।
धीर ने राज्य पुरातत्व विभाग से रत्नाचिरा घाटी के पूरे 60 किलोमीटर का उचित सर्वेक्षण करने और स्मारकों को दर्ज करने की अपील की है।
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