देश की खबरें | ऑनलाइन गेमिंग और शर्त लगाने के नियमन की जरुरत: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
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प्रयागराज, 12 जून इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति जांच करेगी कि क्या ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को विनियमित करने की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने कहा कि मौजूदा सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 ब्रिटिश शासन के जमाने का कानून है जो केवल ताश के पत्ते जैसे पारंपरिक खेलों के नियमन तक सीमित है।
अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के आर्थिक सलाहकार प्रोफेसर केवी राजू की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया जाए जिसमें प्रमुख सचिव (राज्य कर) को सदस्य के तौर पर शामिल किया जा सकता है। इनके अलावा विशेषज्ञ भी सदस्य हो सकते हैं।
अदालत ने सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत आरोपी इमरान खान और एक अन्य आरोपी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इन आरोपियों ने आरोप और अपने खिलाफ मुकदमा रद्द करने की मांग की।
पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी आगरा में अपने घर से ऑनलाइन सट्टेबाजी का रैकेट चला रहे थे और करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे थे।
उच्च न्यायालय ने कहा, “सार्वजनिक जुआ अधिनियम, डिजिटल युग से पूर्व का कानून है जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, सर्वर या सीमा पार लेनदेन का कोई जिक्र नहीं है और इसका प्रवर्तन भौतिक जुआ घरों तक सीमित है और वर्चुअल गेमिंग इसके दायरे में नहीं आता।”
अदालत ने कहा कि ऑनलाइन जुआ के जमाने में मौजूदा कानून ने अपना प्रभाव और प्रासंगिकता खो दी है क्योंकि इस कानून में ऑनलाइन गेमिंग की कोई परि या नियमन नहीं है। साथ ही ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म मनोवैज्ञानिक रूप से चालाकीपूर्ण रिवार्ड प्रणाली और अधिसूचना का उपयोग करते हैं जिससे लोगों में गेमिंग की लत लग जाती है।
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