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देश की खबरें | मध्यस्थता के निर्णय पर अमल में देरी को लेकर न्यायालय ने कहा: ‘स्थिति बेहद निराशाजनक’

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देश की खबरें | मध्यस्थता के निर्णय पर अमल में देरी को लेकर न्यायालय ने कहा: ‘स्थिति बेहद निराशाजनक’

नयी दिल्ली, दो अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता (पंचाट) के निर्णय पर अमल में देरी को लेकर चिंता जताई है और इसे बेहद निराशाजनक स्थिति करार दिया है।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें 1992 में मध्यस्थता निर्णय पर 30 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अमल नहीं हो सका है।

न्यायालय ने कहा कि यह मामला मध्यस्थता अधिनियम के तहत मध्यस्थता की कार्यवाही को नाकाम किए जाने का एक ज्वलंत उदाहरण है।

उसने कहा कि मध्यस्थता का निर्णय 1992 में पारित किया गया था और इससे जुड़ी निष्पादन याचिका 2003 की है, जिसके अभी भी लंबित होने की सूचना है।

पीठ ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस पक्षकार के पक्ष में फैसला सुनाया गया था, वह 30 साल की अवधि के बाद भी निर्णय का लाभ पाने की स्थिति में नहीं है। यहां तक ​​कि फैसले के निष्पादन की अर्जी भी 19 साल से अधिक समय से लंबित है।”

उसने कहा, “यह बेहद निराशाजनक स्थिति है कि मध्यस्थता अधिनियम के तहत पारित निर्णय पर अमल के लिए निष्पादन की कार्यवाही भी 20 साल से अधिक समय से लंबित है।”

पीठ ने कहा कि मध्यस्थता अधिनियम के तहत पारित आदेश को अगर जल्द से जल्द लागू नहीं किया जाता है तो इससे मध्यस्थता अधिनियम के साथ-साथ वाणिज्यिक अदालत अधिनियम की मंशा और उद्देश्य भी नाकाम हो जाएगा।

उसने कहा, “यहां तक ​​कि नए वाणिज्यिक अदालत अधिनियम-2015 के तहत भी वाणिज्यिक विवाद को निर्धारित समयसीमा यानी एक साल के भीतर निपटाया जाना जरूरी है।”

पीठ ने कहा कि इलाहाबाद में उच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्राधिकार के तहत आने वाली अदालतों में ऐसी कई निष्पादन याचिकाएं लंबित होंगी।

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वह पूरे राज्य में अधीनस्थ/कार्यकारी अदालतों में लंबित निष्पादन याचिकाओं को रिकॉर्ड पर रखें।

पीठ ने कहा, “विस्तृत रिपोर्ट के रूप में उक्त सूचना को सुनवाई की अगली तारीख या उससे पहले न्यायालय के सामने पेश किया जाए।”

विचाराधीन मामले के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने निष्पादन अदालत को मौजूदा आदेश की प्राप्ति की तारीख से चार हफ्ते के भीतर निष्पादन याचिका पर अंतिम निर्णय लेने और उसका निपटान करने का निर्देश दिया।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 02, 2022 03:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).