तलाक की वजह नहीं बन सकता सेक्स संबंध बनाने से इनकार करना: ईयू कोर्ट

यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने अपने एक हालिया फैसले में कहा है कि शादी के रिश्ते में सेक्स संबंध बनाना महिलाओं का कर्तव्य नहीं है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने अपने एक हालिया फैसले में कहा है कि शादी के रिश्ते में सेक्स संबंध बनाना महिलाओं का कर्तव्य नहीं है. यह फैसला फ्रांस में बलात्कार की परिभाषा बदले जाने की शुरुआत बन सकता है.फ्रांस की एक महिला ने जब अपने पति के साथ यौन संबंध बनाने बंद कर दिए तो यह उनके तलाक की वजह बन गया. फ्रांस की एक अदालत ने तलाक को मंजूरी भी दे दी. अदालत ने महिला पर दोष लगाया कि तलाक की वजह वह खुद थीं. 69 वर्षीय मिस एच.डब्ल्यू को यह फैसला मंजूर नहीं था. दस साल तक फ्रांस की अदालतों में इस फैसले के खिलाफ अपील करने के बाद वह 2021 में यूरोपीय मानवाधिकार अदालत पहुंचीं.

लगभग तीन साल बाद यूरोपीय अदालत ने मिस एच.डब्ल्यू के पक्ष में फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि फ्रांस की अदालतों ने महिला के पारिवारिक और निजी जीवन के सम्मान के अधिकार का हनन किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया, "अदालत इस केस में यौनिकता जैसे निजी मामले में सरकारी विभागों की दखलअंदाजी को सही ठहराने की कोई वजह नहीं ढूंढ पाई."

मिस एच.डब्ल्यू की शादी 1984 में हुई थी. उनके चार बच्चे भी हैं. वह अपने पति से तलाक लेना चाहती थीं. उनका आरोप था कि उनका पति उन्हें धमकियां देता रहता था और वह बीमार भी रहने लगी थीं. इसलिए 2004 के बाद उन्होंने अपने पति के साथ कोई संबंध नहीं बनाए.

तब मिस एच. डब्ल्यू के पति ने उन पर आरोप लगाए थे कि वह अपनी शादी के कर्तव्यों को पूरा नहीं कर रही हैं. मामला स्थानीय अदालत में पहुंचा और जजों ने मिस. एच. डब्ल्यू को ही शादी के कर्तव्यों को पूरा ना करने का जिम्मेदार ठहराया था.

फ्रांस में महिला अधिकारों के लिए बड़ी जीत

ईयू कोर्ट के फैसले के बाद मिस एच. डब्ल्यू की वकील लिलिया मिस्सन ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अदालत का यह फैसला फ्रांस में महिला अधिकारों के लिए मील का पत्थर साबित होगा.” मिस्सन कहती हैं, "यह जरूरी है कि स्पेन या पुर्तगाल जैसे दूसरे यूरोपीय देशों की तरह फ्रांस भी इस रेप कल्चर को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए और सहमति व आपसी सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा दे."

उनके मुताबिक, इस फैसले का मिस एच.डब्ल्यू के तलाक पर असर नहीं होगा. हालांकि यूरोपीय अदालत का यह फैसला बलात्कार पर फ्रांस के कानून को जरूर प्रभावित करेगा. इससे भविष्य में तलाक के केसों में जज ऐसे फैसले देने से बचेंगे.

मिस एच. डब्ल्यू के केस को फ्रांस की दो महिला अधिकार संगठनों का समर्थन भी हासिल था. इनमें से एक "फेमिनिस्ट कलेक्टिव अंगेस्ट रेप" की इमानुएल पिए कहती हैं कि मिस डब्ल्यू ने इस लड़ाई में अपने 15 साल लगाए हैं और इसका अंत एक जीत के साथ हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि "शादी के रिश्ते में सेक्स के लिए जबरदस्ती करना भी बलात्कार ही है." पिए के मुताबिक, अब अदालतें महिलाओं पर शादी के रिश्ते में यौन संबंध बनाने के फैसले को नहीं थोप सकतीं.

महिला अधिकार संगठनों के मुताबिक, अदालतें आज भी फ्रांस के कानूनों को रूढ़िवादी नजरियों से देखते हुए फैसला सुनाती हैं. इसलिए जरूरी है कि इन कानूनों को और मजबूत किया जाए.

बलात्कार की परिभाषा बदलने की तैयारी

मिस एच. डब्ल्यू केस में फ्रांस की सरकार का प्रतिनिधित्व देश के यूरोप व विदेशी मामलों के मंत्रालय ने किया. फ्रांस सरकार ने इस फैसले को कबूल करते हुए कहा कि बलात्कार की परिभाषा में बदलाव संबंधित विधेयक पर संसद में विचार किया जा रहा है. फ्रांस के न्याय मंत्री जेराल्ड डरमाना ने कहा कि वह कानूनविदों से कानून में सुधार करने के संबंध में चर्चा करेंगे.

एक साल के अंदर फ्रांस में महिला अधिकारों से जुड़ा यह दूसरा फैसला है जिसने सरकार को बलात्कार की परिभाषा बदलने के लिए मजबूर किया है. खासकर शादी के रिश्ते में महिलाओं की सहमति के महत्व का मुद्दा केंद्र में आया है.

जिसेल पेलिको केस के बाद आए बदलाव

हाल ही में फ्रांस में जिसेल पेलिको केस में आए फैसले ने महिला अधिकारों को और सशक्त किया है. पेलिको के पूर्व पति ने करीब 50 से अधिक लोगों से जिसेल का बलात्कार करवाया था. सभी दोषियों को कोर्ट ने 3 से 20 साल तक की सजा दी है.

जिसेल ने आगे आकर दुनियाभर में महिलाओं को अपने साथ हुई हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत दी. उनका कहा वाक्य "शर्म को अपना पलड़ा बदलना होगा" आज एक नारे में तब्दील हो चुका है.

संयुक्त राष्ट्रके आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में हर पांचवीं महिला ने अपने जीवन में कभी ना कभी अपने पार्टनर की ओर से शारीरिक या यौन हिंसा झेली. यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का हालिया फैसला भी एक नजीर बनकर उभर सकता है. इसने शादी के रिश्ते में महिलाओं की सहमति के महत्व को रेखांकित किया है. बलात्कार की परिभाषा में अमूमन वैवाहिक बलात्कार को नहीं शामिल किया जाता. जिन देशों में वैवाहिक बलात्कार को गैर-कानूनी घोषित किया गया है, वहां आज भी महिलाओं को अपना पक्ष रखने में कई स्तरों पर चुनौती झेलनी पड़ती है.

कानून होने के बावजूद शादी के रिश्ते में बलात्कार साबित करना सर्वाइवर और न्याय व्यवस्था- दोनों के लिए ही चुनौती बन जाता है. इसलिए महिला अधिकार संगठनों की मांग रही है कि पहले से मौजूद कानूनों में वैवाहिक बलात्कार की परिभाषा को और अधिक स्पष्ट किया जाए.

आरआर/आरएस (रॉयटर्स)

Share Now

संबंधित खबरें

IPL 2026 Points Table With Net Run-Rate (NRR): राजस्थान रॉयल्स से जीतकर सातवें पायदान पर पहुंची दिल्ली कैपिटल्स, टॉप तीन पर इन टीमों का कब्जा, देखें अपडेट पॉइंट्स टेबल

DC vs RR, IPL 2026 62nd Match Scorecard: रोमांचक मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने राजस्थान रॉयल्स को 5 विकेट से दी करारी शिकस्त, केएल राहुल और अभिषेक पोरेल ने खेली ताबड़तोड़ अर्धशतकीय पारी; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

CSK vs SRH, IPL 2026 63rd Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा चेन्नई सुपरकिंग्स बनाम सनराइजर्स हैदराबाद के बीच रोमांचक मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

Central Railway: RPF ने चार महीने में 584 बच्चों और जरूरतमंद लोगों को परिवार से मिलाया, 25 यात्रियों की बचाई जान