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दिनाकरण गुट को ‘प्रेशर कुकर’ चुनाव चिह्न देने से मना करने के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज

हालांकि, न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से कहा था कि वह दिनाकरण के धड़े को एक समान चुनाव चिह्न उपलब्ध कराए।

दिनाकरण गुट को ‘प्रेशर कुकर’ चुनाव चिह्न देने से मना करने के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज
जमात

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल के अपने उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है, जिसने 2019 लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव में ‘प्रेशर कुकर’ चुनाव चिह्न हासिल करने की अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता टीटीवी दिनाकरण के नेतृत्व वाले धड़े की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।

हालांकि, न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से कहा था कि वह दिनाकरण के धड़े को एक समान चुनाव चिह्न उपलब्ध कराए।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता एवं न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ‘‘हमने पुनर्विचार याचिका एवं संबंधित दस्तावेजों पर गौर किया हैं। हमें आदेश में ऐसी कोई त्रुटि नजर नहीं आती जिस पर बहस की जा सके और उस पर पुनर्विचार किया जाए। अत: यह पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है।’’

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री एवं अन्नाद्रमुक की प्रमुख रहीं दिवंगत जे जयललिता की निकट सहयोगी वी के शशिकला ने यह पुनर्विचार याचिका दायर की थी जिसपर 23 अप्रैल को विचार किया गया था लेकिन आदेश को बृहस्पतिवार को न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

उच्चतम न्यायालय ने टीटीवी दिनाकरण के नेतृत्व वाले धड़े का ‘प्रेशर कुकर’ चुनाव चिह्न पर दावा स्वीकार करने से पिछले साल 26 मार्च को इनकार कर दिया था।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वह 2019 लोकसभा चुनाव और तमिलनाडु तथा पुडुचेरी विधानसभा उपचुनाव के लिये दिनाकरण धड़े के प्रत्याशियों को एक समान चुनाव चिह्न उपलब्ध कराए।

यह फैसला 2019 लोकसभा चुनाव और तमिलनाडु एवं पुडुचेरी के विधानसभा उपचुनावों के लिए नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख पर सुनाया गया था।

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि यदि दिनाकरण के नेतृत्व वाले धड़े के उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा उपचुनाव जीतते हैं तो ‘‘उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार ही समझा जाएगा’’।

पीठ ने कहा था कि निर्वाचन आयोग से एक समान चुनाव चिह्न आवंटित करने को कहने संबंधी उसके आदेश का मतलब दिनाकरण के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक धड़े को राजनीतिक समूह के रूप में मान्यता देना नहीं है और इस धड़े के प्रत्याशियों को निर्दलीय ही माना जायेगा।

पीठ ने कहा था कि दिनाकरण धड़े का राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण करने का काम निर्वाचन आयोग का है और इस बारे में वही उचित कदम उठायेगा।

पीठ ने कहा था कि इस धड़े द्वारा उसके समक्ष पेश सूची में शामिल 59 प्रत्याशियों को उपलब्ध चुनाव चिह्न में से एक समान चुनाव चिह्न देने पर विचार करने का उसका निर्देश समान अवसर और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिये है।

उच्च न्यायालय ने पिछले साल 28 फरवरी को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले धड़े को ‘अन्नाद्रमुक’ नाम और ‘दो पत्ती’ वाला चुनाव चिन्ह देने के चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती वाली दिनाकरण और शशिकला की याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 30, 2020 07:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).