जरुरी जानकारी | आरबीआई को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये नीतिगत दर में करनी चाहिए और कटौती: विशेषज्ञ

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मुंबई, 30 जुलाई विदेशी ब्रोकरेज कंपनी बार्कलेज के विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को कहा कि रिजर्व बैंक को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये सकल मुद्रास्फीति में वृद्धि के बावजूद अगले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में एक और कटौती करनी चाहिए।

बार्कलेज के विश्लेशकों ने कहा कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर आरबीआई के नीति परिदृश्य को लेकर भ्रम पैदा कर रही है। लेकिन उसने ‘हवा के रुख को भांपते हुए’ मांग बढ़ाने के लिये रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की वकालत की।

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उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जून में रिजर्व बैंक के लक्ष्य के हिसाब से अधिकतम सीमा 6 प्रतिशत को पार कर गयी।

सरकारी आंकड़े के अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति जून महीने में बढ़कर 6.09 प्रतिशत रही। मुख्य रूप से खाने-पीने का सामान महंगा होने से महंगाई दर बढ़ी। रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है।

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इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने कोविड-19 महामारी के बाद दो बार में नीतिगत दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती की है। इस महामारी का अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

विश्लेषकों ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि आरबीआई अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में नरम नीतिगत रुख को कायम रखते हुए रेपो दर में कम-से-कम 0.25 प्रतिशत की कटौती करेगा।’’ विश्लेषकों ने 4 से 6 अगस्त के बीच होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले यह बात कही।

विश्लेषकों ने यह भी कहा कि गतिविधियों पर जो प्रभाव पड़ा है, वह नीतिगत दर को और नरम बनाने तथा तेजी से कटौती का समर्थन करता है।

उनका कहना है, ‘‘हम इस बात पर भरोसा नहीं करते कि नीतिगत दर में कटौती का लाभ ब्याज दरों में कमी के रूप में ग्राहकों को लाभ मिलने में लगने वाले समय को देखते हुए भविष्य के लिये ‘हथियार बचाये रखने’ की जरूरत है।’’

इस बीच, सिंगापुर के डीबीएस बैंक ने कहा कि अगले सप्ताह पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को यथावत रखने की संभावना है लेकिन अक्टूबर से मार्च 2021 के बीच इसमें 0.50 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है।

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