जरुरी जानकारी | आरबीआई ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को चार प्रतिशत के निचले स्तर पर बरकरार रखा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को टिकाऊ आधार पर गति देने को लेकर बृहस्पतिवार को प्रमुख नीतिगत दर रेपो में लगातार 10वीं बार कोई बदलाव नहीं किया और इसे चार प्रतिशत के निचले स्तर पर बरकरार रखा। नीतिगत दर यथावत रहने का मतलब है कि बैंक कर्ज की मासिक किस्त में कोई बदलाव नहीं होगा।

मुंबई, 10 फरवरी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को टिकाऊ आधार पर गति देने को लेकर बृहस्पतिवार को प्रमुख नीतिगत दर रेपो में लगातार 10वीं बार कोई बदलाव नहीं किया और इसे चार प्रतिशत के निचले स्तर पर बरकरार रखा। नीतिगत दर यथावत रहने का मतलब है कि बैंक कर्ज की मासिक किस्त में कोई बदलाव नहीं होगा।

साथ ही आरबीआई ने मुद्रास्फीति की ऊंची दर के बीच नीतिगत मामले में उदार रुख को बरकरार रखा। यानी हाल-फिलहाल नीतिगत दर में वृद्धि की संभावना नहीं है।

आरबीआई गवर्नर ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) ने रेपो दर को चार प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय किया है। साथ ही रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत पर यथावत रखा है।’’

रेपो दर वह दर है जिसपर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिये कर्ज देता है। जबकि रिवर्स रेपो दर के तहत बैंकों को अपना पैसा आरबीआई को देने पर ब्याज मिलता है।

उन्होंने कहा कि छह सदस्यीय एमपीसी ने आम सहमति से नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय किया। जबकि 5 सदस्यों ने जबतक जरूरी हो उदार रुख बनाये रखने के पक्ष में मतदान किया। एक सदस्य इसके पक्ष में नहीं थे।

दास ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति के मामले में कदम सोच-विचारकर उठाये जाएंगे और चीजों के बारे में समय रहते जानकारी दी जाएगी।’’ इसके जरिये उन्होंने संकेत दिया कि रिजर्व बैंक की तरफ से अचंभित करने वाला कोई कदम नहीं होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि परिदृश्य खासकर मुद्रास्फीति परिदृश्य में सुधार, ओमीक्रोन को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक संकट के असर पर गौर करते हुए, एमपीसी का विचार था कि टिकाऊ और व्यापक पुनरूद्धार के लिये नीतिगत समर्थन की अभी जरूरत है।’’

हालांकि रेपो दर के मामले में स्थिति यथावत रहने की उम्मीद थी लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना था कि अल्पकालीन मुद्रा बाजार दरों के साथ तालमेल को लेकर रिवर्स रेपो दर में वृद्धि हो सकती है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘‘सरकार का पूंजीगत व्यय और निर्यात पर जोर से उत्पादक क्षमता बढ़ेगी और इससे सकल मांग मजबूत होगी। इससे निजी निवेश भी बढ़ेगा।’’

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिये आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह 2021-22 के 9.2 प्रतिशत के अनुमान से कम है। इसका कारण महामारी के कारण उत्पन्न अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर जिंसों के दाम में तेजी है।

केंद्रीय बैंक ने अगले वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी है जो चालू वित्त वर्ष में 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

मुख्य रूप से खाने का सामान महंगा होने से खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर महीने में बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर 5.59 प्रतिशत हो गयी जो नवंबर में 4.91 प्रतिशत थी। वहीं थोक महंगाई दर मामूली रूप से कम होकर 13.56 प्रतिशत रही। हालांकि यह लगातार नौ महीने से दहाई अंक में बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि सकल मुद्रास्फीति (हेडलाइन इनफ्लेशन) 2021-22 की चौथी तिमाही में उच्च स्तर पर रह सकती है। हालांकि यह लक्ष्य दायरे के भीतर होगी और 2022-23 की दूसरी छमाही में नरम होगी। इससे मौद्रिक नीति क रुख उदार बने रहने की गुंजाइश होगी।

अन्य घोषणाओं में नकदी प्रबंधन को लेकर रिवर्स रेपो और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) व्यवस्था का लाभ उठाने के समय में कमी करना शामिल है। इसे महामारी-पूर्व स्तर पर लाया गया है। परिवर्तनशील रेपो, 14 दिन के रिवर्स रेपो व्यवस्था नकदी प्रबंधन के मुख्य साधन होंगे।

आरबीआई ने महामरी के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को राहत प्रदान करने के लिये मार्च 2020 से रेपो दर में 1.15 प्रतिशात की कटौती कर चुका है।

दास ने कहा, ‘‘महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बार फिर प्रभावित किया है... कई देशों में दैनिक आधार पर संक्रमण की रिकार्ड संख्या और परिणामस्वरूप उसकी रोकथाम के लिये लगायी गयी विभिन्न पाबंदियों से आर्थिक गतिविधियों की गति पर प्रतिकूल असर पड़ा है।’’

उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में अलग तरह से पुनरुद्धार हो रहा है, देश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से आर्थिक वृद्धि हासिल करने अर्थव्यवस्था होगा।

दास ने कहा कि आर्थिक पुनरूद्धार को व्यापक स्तर पर टीकाकरण और सतत राजकोषीय तथा मौद्रिक नीति समर्थन से लाभ हुआ है।

उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन से आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका जतायी है। ‘‘प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से आर्थिक गतिविधियों की गति सुस्त प़ड़ने का संकेत है...संपर्क से जुड़े क्षेत्रों (होटल, पर्यटन आदि) में मांग अभी भी कम है।’’

आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘‘ रिजर्व बैंक घरेलू वित्तीय प्रणाली में भरोसा कायम रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर मजबूती से टिका है..।’’

एमपीसी की अगली बैठक 6-8 अप्रैल, 2022 को होगी।

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