जरुरी जानकारी | आरबीआई ने राज्यों के लिए अस्थायी कर्ज सुविधा की सीमा घटाकर 47,010 करोड़ रुपये तय की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अर्थोपाय अग्रिम (वेज एंड मीन्स एडवांसेज - डब्ल्यूएमए) यानी अस्थायी कर्ज सुविधा की सीमा को 51,560 करोड़ रुपये से घटाकर 47,010 करोड़ रुपये करने का फैसला किया।
मुंबई, एक अप्रैल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अर्थोपाय अग्रिम (वेज एंड मीन्स एडवांसेज - डब्ल्यूएमए) यानी अस्थायी कर्ज सुविधा की सीमा को 51,560 करोड़ रुपये से घटाकर 47,010 करोड़ रुपये करने का फैसला किया।
महामारी के प्रकोप में सुधार के मद्देनजर यह कटौती की गई।
डब्ल्यूएमए राज्यों की प्राप्तियों और भुगतानों में किसी भी अंतर से निपटने के लिए आरबीआई द्वारा उन्हें दिया गया अस्थाई कर्ज है। इसका मकसद राज्यों को वित्तीय मोर्चे पर होने वाली कठिनाइयों को दूर करना है।
कोविड-19 महामारी से संबंधित अनिश्चितताओं के चलते आरबीआई ने सभी राज्यों के लिए डब्ल्यूएमए की सीमा बढ़ाकर 51,560 करोड़ रुपये कर दी थी। यह सीमा 31 मार्च 2022 तक लागू थी।
आरबीआई ने कहा कि कोविड-19 प्रतिबंधों में क्रमिक रूप से दी गई राहत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए डब्ल्यूएमए सीमा और ओवर ड्राफ्ट (ओडी) की समयसीमा को वापस पिछले स्तर पर लाने का फैसला किया गया है।
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए डब्ल्यूएमए की सीमा 47,010 करोड़ रुपये होगी। ये मानदंड एक अप्रैल 2022 से प्रभावी होंगे।
आरबीआई ने आगे कहा कि राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलने वाली विशेष आहरण सुविधा (एसडीएफ) को नीलामी ट्रेजरी बिल (एटीबी) सहित भारत सरकार द्वारा जारी विपणन योग्य प्रतिभूतियों में उनके निवेश की मात्रा से जोड़ा जाना जारी रहेगा।
एसडीएफ, डब्लूएमए और ओडी पर ब्याज दर रिजर्व बैंक की नीतिगत दर - रेपो दर से जुड़ी रहेगी।
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