देश की खबरें | रामनवमी हिंसा: उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ बंगाल की याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई

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नयी दिल्ली, 17 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल में रामनवमी समारोहों के दौरान हिंसा की घटनाओं की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने जानना चाहा कि क्या राज्य पुलिस की ओर से दर्ज की गई छह प्राथमिकी एक ही घटना से संबंधित हैं?

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि 30 मार्च और दो अप्रैल को हुई घटनाओं के लिए प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं।

पीठ ने पूछा, ‘‘छह प्राथमिकी हैं... क्या वे सभी एक ही घटना से संबंधित हैं?’’ पीठ ने कहा, ‘‘आखिरकार, हमें आरोपों के मूल की पड़ताल करनी है।’’

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख निर्धारित की।

पीठ ने 19 मई को जांच का जिम्मा एनआईए को सौंपने के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी ने मामला दर्ज किया है।

पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और गोपाल शंकरनारायणन ने 19 मई को सुनवाई के दौरान कहा था कि उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में चंदन नगर घटना से संबंधित केवल एक प्राथमिकी का उल्लेख किया था।

शंकरनारायणन ने कहा था, "हमारे पास निर्देश हैं कि अदालत चंदन नगर प्राथमिकी की जांच एनआईए को करने की अनुमति दे सकती है, लेकिन बाकी पांच प्राथमिकियों की जांच राज्य पुलिस को करने की अनुमति दी जाए।"

सिंघवी ने कहा था कि एनआईए को हिंसा के सामान्य मामलों में तब तक नहीं लाया जा सकता जब तक कि यह देश की सुरक्षा या संप्रभुता को प्रभावित न करे।

राज्य के शीर्ष भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और पीएस पटवालिया ने कहा था कि एनआईए ने मामला दर्ज कर लिया है और भले ही उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी जाए, जांच जारी रहेगी।

पश्चिम बंगाल सरकार ने जांच को एनआईए को स्थानांतरित करने के उच्च न्यायालय के आदेश की आलोचना करते हुए कहा है कि किसी भी विस्फोटक का इस्तेमाल नहीं किया गया था। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि यह निर्देश राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की ‘राजनीति से प्रेरित’ जनहित याचिका पर पारित किया गया था।

सिंघवी ने कहा था कि राज्य पुलिस को विस्फोटकों के इस्तेमाल का कोई उदाहरण नहीं मिला, जिससे जांच में एनआईए की भागीदारी की आवश्यकता महसूस हो।

उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल के अपने आदेश में राज्य पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि सभी प्राथमिकी, दस्तावेज, जब्त की गई सामग्री और सीसीटीवी फुटेज आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर एनआईए को सौंप दिए जाएं।

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