देश की खबरें | पूर्वोत्तर के राज्यसभा सांसदों ने सभापति से की मुलाकात, मणिपुर पर अल्पकालिक चर्चा की मांग की
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नयी दिल्ली, 26 जुलाई पूर्वोत्तर राज्यों के सांसदों के एक समूह ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की और उनसे मणिपुर की स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा शुरु करने का आग्रह किया।
बाद में मीडिया से बात करते हुए, सांसदों ने कहा कि उन्होंने नियम 176 के तहत बहस का अनुरोध किया है, जो अल्पकालिक चर्चा के लिए है।
विपक्षी दल नियम 267 के तहत मणिपुर की स्थिति पर बहस की मांग कर रहे हैं। इसमें दिन के अन्य सभी सूचीबद्ध कार्यों को स्थगित कर चर्चा कराने का प्रावधान है।
राज्यसभा से असम गण परिषद के सांसद बीरेंद्र प्रसाद बैश्य ने कहा, ‘‘हम मणिपुर की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं और इस मानसून सत्र के पहले ही दिन से हम मणिपुर की स्थिति पर चर्चा करना चाहते थे। संसद के नियमों और प्रावधानों के अनुसार हमने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था... हम मणिपुर की स्थिति पर कोई राजनीतिक खेल नहीं चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि स्थिति का तत्काल समाधान हो।’’
असम से भाजपा सांसद भुवनेश्वर कालिता ने विपक्ष पर चर्चा में बाधा डालने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘इस पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए। जैसा कि आपने देखा है, विपक्ष... मणिपुर पर चर्चा से बचने और सदन में गतिरोध पैदा करने के लिए अन्य मुद्दे लेकर आ जाता है।’’
भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब, फान्गयोंग कोन्याक, पबित्र मार्गेरिटा, कामाख्या प्रसाद तासा, महाराजा सनाजाओबा लीशेम्बा, नबाम रेबिया, मिजो नेशनल फ्रंट के के वनलालवेना, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के हिशे लाचुंगपा, नेशनल पीपुल्स पार्टी के वानवीरॉय खारलुखी उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने सभापति को सौंपे गए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी। तब से दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित है क्योंकि विपक्षी दल चर्चा से पहले मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की मांग कर रहे है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर चार मई की एक घटना का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने मणिपुर हिंसा पर सरकार को घेरने की कोशिश की है, जिसमें दो महिलाओं को भीड़ द्वारा निर्वस्त्र कर घुमाया गया था।
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर तीन मई से जातीय हिंसा की चपेट में है, जिसमें 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
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