ताजा खबरें | राज्यसभा ने मध्यस्थता की प्रक्रिया को सुगम बनाने के प्रावधान वाले विधेयक को दी मंजूरी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा ने देश में मध्यस्थता की प्रक्रिया को सुगम बनाने तथा अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से एक विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इस विधेयक में भारतीय मध्यस्थता परिषद स्थापित करने का भी प्रावधान है।

नयी दिल्ली, एक अगस्त राज्यसभा ने देश में मध्यस्थता की प्रक्रिया को सुगम बनाने तथा अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से एक विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इस विधेयक में भारतीय मध्यस्थता परिषद स्थापित करने का भी प्रावधान है।

राज्यसभा ने मध्यकता विधेयक 2021 को चर्चा के बाद सरकार द्वारा लाये गये विभिन्न संशोधनों के साथ ध्वनिमत से मंजूरी दी। इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कानून एवं विधि मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि भारतीय परंपरा में ग्राम पंचायतें मध्यस्थता की भूमिका निभाती थीं किंतु ब्रिटिश शासन आने के बाद पंचायतों की भूमिका कम होने लगी और लोग अदालतों की प्रक्रिया में उलझ गये।

उन्होंने उच्चतम न्यायालय के पूर्व में दिए गए दो निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यस्थता अधिनियम बनाने की काफी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगस्त 2021 में यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया और इसे स्थायी समिति में भेजा गया।

मेघवाल ने कहा कि सरकार ने समिति के 25 सुझावों को मान लिया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से निकाले गये समाधान को लागू कराने के मामले में यह विधेयक कानून बनने के बाद महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

उन्होंने कहा कि विधेयक में मध्यस्थता की प्रक्रिया को लचीली और स्वैच्छिक प्रक्रिया बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह किफायती प्रक्रिया है जिसमें धन के साथ समय भी कम लगेगा।

मेघवाल ने उम्मीद जतायी कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में कमी आयेगी।

इससे पहले विधेयक पर चर्चा के दौरान अधिकतर सदस्यों ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि आज के समय में मध्यस्थता बहुत ही जरूरी है। अधिकतर सदस्यों ने यह भी कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया को निर्धारित समयावधि में निपटाया जाना बहुत महत्वपूर्ण है।

उच्च सदन में जब इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे पारित किया गया, उस समय विपक्ष के सदस्य उपस्थित नहीं थे। विपक्षी दलों के सदस्य मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की मांग को लेकर पहले ही सदन से बहिर्गमन कर गये थे।

विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों में कहा गया है कि इसका उद्देश्य वाणिज्यिक एवं अन्य विवादों का समाधान मध्यस्थता विशेषकर संस्थागत मध्यस्थता के जरिये करने को प्रोत्साहन और सहूलियतें दी जाएंगी। इसमें मध्यस्थता के माध्यम से निकाले गये समझौते को लागू करवाने का प्रावधान है।

विधेयक में मध्यस्थता करने वालों के पंजीकरण के लिए एक निकाय - भारतीय मध्यस्थता परिषद स्थापित करने का प्रावधान है। विधेयक में आनलाइन मध्यस्थता का भी प्रावधान किया गया है। इसमें मध्यस्थता की प्रक्रिया को 180 दिनों में पूरा करने का भी प्रावधान है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\