ताजा खबरें | राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई और सभापति जगदीप धनखड़ ने मणिपुर मुद्दे पर सदन में गतिरोध कायम रहने के कारण कामकाज बाधित होने पर अफसोस जताया।

नयी दिल्ली, 11 अगस्त राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई और सभापति जगदीप धनखड़ ने मणिपुर मुद्दे पर सदन में गतिरोध कायम रहने के कारण कामकाज बाधित होने पर अफसोस जताया।

सभापति धनखड़ ने अपराह्न दो बज कर करीब 50 मिनट पर उच्च सदन की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इसके पहले सदन में राष्ट्रगीत की धुन बजायी गई।

राज्यसभा में मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और इस दौरान सदन की कुल 17 बैठकें हुईं।

धनखड़ ने सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि 17 बैठकों के दौरान व्यवधानों के कारण कुल 50 घंटे और 21 मिनट बर्बाद हुए, जिससे 260वें सत्र की समग्र उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

सभापति ने कहा कि सत्र के दौरान कुछ विधेयकों को पारित किया गया जिनमें जीवंत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कुछ मौकों पर प्रश्न लिए गए लेकिन उन्हें लगता है कि प्रश्नकाल की उत्पादकता और अधिक हो सकती थी।

उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान राज्यसभा में सकारात्मक घटनाक्रम भी देखा गया।

सभापति ने कहा कि उन्होंने पीठासीन अध्यक्ष के पैनल में महिला सदस्यों को उचित प्रतिनिधित्व देते हुए, सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन में उनके प्रबंधकीय कौशल का उपयोग करने का प्रयास किया।

धनखड़ ने कहा, ‘‘मुझे लगता है, उन्होंने अपनी भूमिका निभायी और हमें गौरवान्वित किया है। इसी तरह, सचिवालय ने सराहनीय कदम उठाते हुए, अपनी महिला कर्मचारियों को प्रतिष्ठित सदन के भीतर महत्वपूर्ण ड्यूटी में भाग लेने का अवसर देकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रगतिशील पहल की।’’

सभापति ने कहा, ‘‘मैंने कुछ निर्णय दिए और कुछ टिप्पणियां की हैं। इस प्रतिष्ठित सदन से लोगों की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए, इस प्रतिष्ठित सदन के सभापति के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए मैंने कुछ कष्टप्रद निर्णय लिए। मुझे उम्मीद है कि जब हम अगली बार मिलेंगे तो सत्र अधिक उत्पादक होगा।’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘राज्यसभा का 260वां सत्र समाप्त हो रहा है। आइए, हम सार्थक शासन और विधायी कार्रवाई की दिशा में अपनी यात्रा में तय की गई दूरी का आकलन करें।’’

सभापति ने कहा, ‘‘एक बार फिर, हम संकीर्ण हितों के आकर्षण में आ गए और सदन में अव्यवस्था को सामान्य बात होने दिया। ऐसा लगता है कि मेरी अपीलों का सदस्यों पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ा।’’

उन्होंने कहा कि सदन में बार-बार व्यवधान से स्पष्ट होता है कि उनके संदेश पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

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