देश की खबरें | रेल गोलीबारी कांड : पुलिस ने आरपीएफ कांस्टेबल का नार्को परीक्षण कराने के लिए अदालत से अनुमति मांगी
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मुंबई, 10 अगस्त रेलवे पुलिस ने चलती ट्रेन में अपने वरिष्ठ अधिकारी और तीन यात्रियों की हत्या करने के आरोपी आरपीएफ के कांस्टेबल चेतन सिंह का ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को परीक्षण कराने के लिए अदालत से अनुमति मांगी है।
सिंह का परीक्षण कराए जाने की अनुमति का अनुरोध करते हुए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने बोरीवली की मजिस्ट्रेट अदालत से कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहन जांच करने की अवश्यकता है।
सिंह के वकील अमित मिश्रा और आजाद गुप्ता ने बृहस्पतिवार को जीआरपी के आवेदन का विरोध किया और कहा कि आरोपी के पिछले 11 दिनों से हिरासत में होने के बावजूद पहले जांच क्यों नहीं की गई।
मिश्रा और गुप्ता ने अदालत को बताया कि विशेषज्ञों की सलाह लेने के बाद आरोपियों पर ऐसे परीक्षणों के प्रभाव पर भी विचार किया जाना चाहिए।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले को स्थगित कर दिया और आरोपी को अपना पक्ष रखने को कहा।
हत्या और अपहरण के अलावा जीआरपी ने सिंह के खिलाफ मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) भी जोड़ी है।
आरोपी 11 अगस्त तक पुलिस हिरासत में है।
गोलीबारी की यह घटना 31 जुलाई को तड़के तब हुई, जब आरोपी सिंह ने जयपुर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस में अपने वरिष्ठ अधिकारी टीका राम मीणा और तीन यात्रियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के समय ट्रेन मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित पालघर स्टेशन के निकट थी।
घटना के बाद सिंह ने भागने की कोशिश की लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और उसके पास से हथियार भी बरामद हुए। यात्रियों ने ट्रेन की चेन खींचकर मीरा रोड स्टेशन के पास ट्रेन को रोका था।
मृतक यात्रियों की पहचान पालघर जिले के नालासोपारा निवासी अब्दुल कादरभाई मोहम्मद हुसैन भानपुरवाला (48), बिहार के मधुबनी के निवासी असगर अब्बास शेख (48) और मूल रूप से कर्नाटक के बिदर के रहने वाले और हैदराबाद में बसे सैयद सैफुद्दीन के रूप में हुई थी।
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