देश की खबरें | राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 2011 की जनगणना के जातिगत आंकड़े जारी करने की चुनौती दी
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कोलार (कर्नाटक), 16 अप्रैल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2011 की जाति आधारित जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की चुनौती दी और आरक्षण पर से 50 फीसदी की सीमा हटाने की मांग की।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि केंद्र सरकार में केवल सात प्रतिशत सचिव अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी), दलित और आदिवासी समुदाय के हैं।
पिछले महीने मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराए जाने पर संसद सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद गांधी की कर्नाटक में यह पहली रैली है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने 2011 में सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना (एसईसीसी) की थी। जातिगत आंकड़ों को छोड़कर जनगणना की रिपोर्ट प्रकाशित कर दी गई थी।
उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। न्यायालय के मुताबिक विभिन्न समुदायों के लिए सरकारी नौकरियों तथा शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की सीमा पार नहीं होनी चाहिए। हालांकि कुछ राज्यों में इस सीमा से ज्यादा आरक्षण प्रदान किया गया है।
गांधी ने 10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कोलार में कांग्रेस की 'जय भारत' चुनावी रैली में कहा, "संप्रग ने 2011 में जाति आधारित जनगणना की। इसमें सभी जातियों के आंकड़े हैं। प्रधानमंत्री जी, आप ओबीसी की बात करते हैं। उस डेटा को सार्वजनिक करें। देश को बताएं कि देश में कितने ओबीसी, दलित और आदिवासी हैं।"
आंकड़ों को सार्वजनिक करने की जरूरत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सभी को देश के विकास का हिस्सा बनना है तो प्रत्येक समुदाय की आबादी का पता लगाना जरूरी है।
गांधी ने कहा, "कृपया जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी करें ताकि देश को पता चले कि ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की जनसंख्या कितनी है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो यह ओबीसी का अपमान है। साथ ही, आरक्षण पर से 50 प्रतिशत की सीमा को हटा दें।"
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि सचिव भारत सरकार की "रीढ़" होते हैं, लेकिन केंद्र सरकार में दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदायों से संबंध रखने वाले केवल सात प्रतिशत सचिव हैं।”
गांधी ने कहा, "सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत में कितने ओबीसी, आदिवासी और दलित हैं। अगर हम धन और सत्ता के बंटवारे की बात करते हैं, तो उनकी आबादी के आकार का पता लगाना पहला कदम होना चाहिए।"
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