विदेश की खबरें | पुतिन 70 साल के हुए: स्थिरता के वादे से लेकर परमाणु हमले की धमकी तक का सफर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पुतिन का हर दांव खाली जाता प्रतीत हो रहा है और वह लगातार संकेत दे रहे हैं कि यूक्रेन में रूसी बढ़त को बचाने के लिए परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह खौफनाक धमकी उनकी स्थिरता के वादे के विपरीत है जिसका निरंतर दावा वह गत 22 साल के अपने शासन में करते आए हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पुतिन का हर दांव खाली जाता प्रतीत हो रहा है और वह लगातार संकेत दे रहे हैं कि यूक्रेन में रूसी बढ़त को बचाने के लिए परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह खौफनाक धमकी उनकी स्थिरता के वादे के विपरीत है जिसका निरंतर दावा वह गत 22 साल के अपने शासन में करते आए हैं।

कार्नेगी इंडाउमेंट के वरिष्ठ शोधकर्ता एंद्रेई कोलेस्निकोव ने कहा, ‘‘यह वास्तव में उनके (पुतिन के) लिए मुश्किल समय है, लेकिन वह इसके लिए किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं। उन्होंने स्वयं यह किया है और बहुत बड़ी समस्या की ओर बढ़ रहे हैं। ’’

उनका कहना है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ कर उन्होंने यूरोप का सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू किया है और इस प्रकार पुतिन ने अलिखित सामाजिक संविदा को तोड़ा है जिसपर रूसी रणनीतिक रूप से सहमत थे। उन्होंने कहा कि माना जाता था कि रूसी समृद्धि और आंतरिक शांति के बदले सोवियत संघ के विघटन के बाद राजनीतिक आजादी त्यागने पर सहमत हुए थे।

क्रेमलिन के कुलीन लोगों के लगातार संपर्क में रहने वाले और पुतिन पर किताब लिखने वाले पत्रकार मिखाइल जाइगर ने रेखांकित किया कि यूक्रेन पर हमले से न केवल जनता स्तब्ध थी बल्कि पुतिन के करीब भी हतप्रभ थे।

जाइगर ने कहा, ‘‘ उनमें से सभी स्तब्ध थे, कोई ऐसी परिस्थिति नहीं देखना चाहता था जिसमें वे सबकुछ हारने वाले हैं। अब सभी के हाथ खून से रंगे हैं और वे जानते हैं कि इससे बच नहीं सकते।’’

लंबे समय से राजनीतिक सलाहकार रहे और सत्तारूढ़ वर्ग से करीबी संपर्क रखने वाले स्टानिस्लाव बेलकोवस्की ने यूक्रेन पर हमले को पुतिन के लिए ‘‘स्व विनाशकारी’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ‘‘उनकी सत्ता और रूसी परिसंघ के लिए भी विनाशकारी है।’’

गौरतलब है कि ठीक ढंग से संगठित हमला नहीं होने की वजह से बड़े पैमाने पर रूसी सेना में अफरातफरी के हालात हैं। रूसी सेना नए भर्ती सैनिकों को जरूरी सामान की आपूर्ति करने में संघर्ष का सामना कर रही है, कई सैनिकों से स्वयं चिकित्सा किट खरीदने को कहा गया है और वे मोर्चें पर जाने से पहले जमीन पर सोने के लिए मजबूर हैं।

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