पुतिन ने जुलाई में समझौते को आगे बढ़ाने से मना कर दिया था। एक साल पहले तुर्किये और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में यह समझौता हुआ था। इसे वैश्विक खाद्य आपूर्तियों, खासकर अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।
यूक्रेन और रूस गेहूं, जौ, सूरजमुखी तेय और अन्य उत्पादों के बड़े आपूर्तिकर्ता हैं।
एर्दोआन ने कहा कि रूस के काला सागर रिसॉर्ट शहर सोच्चि में दोनों नेताओं के बीच दिनभर चली बातचीत में खाद्यान्न समझौता प्रमुख रहा।
उन्होंने बैठक में प्रारंभिक भाषण में कहा, ‘‘सभी अनाज कॉरिडोर मुद्दे पर नजर लगाये हैं।’’
पुतिन ने स्वीकार किया था कि वे यूक्रेन संकट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने एर्दोआन से कहा, ‘‘मुझे पता है कि आप अनाज समझौते के बारे में सवाल पूछने के इच्छुक हैं। हम इस विषय पर बातचीत को तैयार हैं।’’
रूस ने समझौता रद्द करते हुए शिकायत की थी कि खाद्य और उर्वरक के रूसी निर्यात में बाधाओं को दूर करने का वादा करने वाले समानांतर समझौते का सम्मान नहीं किया गया है। उसने कहा कि पोत परिवहन और बीमा पर प्रतिबंध के कारण उसके कृषि व्यापार में बाधा आई है, हालांकि उसने पिछले साल से रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं की आपूर्ति की है।
एपी वैभव माधव
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