देश की खबरें | पंजाब दुग्ध उत्पादक संघ श्वेत क्रांति के लिए बनाया गया था, ना कि रोजगार देने के लिए : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड की स्थापना ‘श्वेत क्रांति’ की ओर एक कदम के तौर पर की गई थी और इसका उद्देश्य दूध का उत्पादन बढ़ाना था, ना कि रोजगार देना था।

नयी दिल्ली, नौ जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड की स्थापना ‘श्वेत क्रांति’ की ओर एक कदम के तौर पर की गई थी और इसका उद्देश्य दूध का उत्पादन बढ़ाना था, ना कि रोजगार देना था।

न्यायामूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश को निरस्त करते हुए यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा , ‘‘संघ की स्थापना श्वेत क्रांति की दिशा में एक कदम के तौर पर की गई थी। संघ का उद्देश्य रोजगार देना नहीं, बल्कि राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ाना था। कर्मचारी इस लक्ष्य की प्राप्ति में नियोक्ता के सहयोगी हैं और इस तरह लक्ष्य और नियोक्ता की वित्तीय स्थिति पर विचार किये बगैर बढ़ा हुआ पारिश्रमिक मांगना सही नहीं है। ’’

पीठ ने कहा, ‘‘नियोक्ता और कर्मचारी को संगठन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साथ मि कर काम करना होगा...। ’’

शीर्ष न्यायालय ने इस बात का जिक्र किया कि संघ (फेडरेशन) 1994 से पहले वित्तीय संकट में था। उसने कहा कि 1996-1997 में इसके फायदे में होने को प्रदर्शित करने के लिए कर्मचारियों द्वारा सूचना का अधिकार कानून के तहत हासिल सूचना प्रासंगिक नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम इस तरह की सूचना एक जनवरी 1986 से एक जनवरी 1994 तक की अवधि के दौरान वित्तीय स्थिति निधार्रित करने के लिए प्रासंगिक नहीं पाते हैं।’’

पीठ ने कहा कि न्यायालय ने यह पाया कि उच्च न्यायालय का आदेश न्यायसंगत नहीं था और न्यायिक समीक्षा की शक्ति से बाहर जाकर दिया गया गया था। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि उच्च का आदेश निरस्त किया जाता है और रिट याचिका खारिज की जाती है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\