देश की खबरें | पंजाब : दो-दिवसीय विधानसभा सत्र से एक दिन पहले राज्यपाल ने तीन विधेयकों को रोका
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर विधानसभा की शुक्रवार से शुरू हो रही दो-दिवसीय बैठक में पेश किए जाने वाले तीन विधेयकों को अपनी मंजूरी रोक दी। इसके साथ ही पंजाब के राजभवन और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के बीच टकराव का नया दौर शुरू हो गया है।
चंडीगढ़, 19 अक्टूबर पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर विधानसभा की शुक्रवार से शुरू हो रही दो-दिवसीय बैठक में पेश किए जाने वाले तीन विधेयकों को अपनी मंजूरी रोक दी। इसके साथ ही पंजाब के राजभवन और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के बीच टकराव का नया दौर शुरू हो गया है।
पुरोहित ने कहा, ‘‘भगवंत मान सरकार को इस ‘अनिश्चित सत्र’ को जारी रखने के बजाय मानसून या शीतकालीन सत्र बुलाने का ‘सशक्त सुझाव’ दे रहा हूं।’’
राज्यपाल ने कहा कि यदि भगवंत मान सरकार ‘स्पष्ट रूप से अवैध सत्र’ जारी रखती है, तो वह राष्ट्रपति को मामले की रिपोर्ट करने सहित उचित कार्रवाई पर विचार करने के लिए मजबूर होंगे।
राज्यपाल ने विधानसभा के प्रस्तावित सत्र को ‘अवैध’ बताया है और कहा है कि इस सत्र में किया गया कोई भी विधायी कार्य ‘गैर-कानूनी’ होगा, लेकिन राजभवन की इन आपत्तियों के बावजूद आम आदमी पार्टी (आप) सरकार सत्र आयोजित करने को तैयार है।
पुरोहित ने अपने नवीनतम संदेश में कहा कि उन्हें तीन धन विधेयक- पंजाब राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2023, पंजाब माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2023 और भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) विधेयक, 2023--प्राप्त हुए हैं, जिन्हें 'विधानसभा के चतुर्थ बजट सत्र के विशेष सत्र' में पेश करने के लिए उनकी स्वीकृति के वास्ते भेजा गया है।
पुरोहित ने लिखा कि उन्होंने अपने 24 जुलाई और 12 अक्टूबर के पत्रों में पहले ही संकेत दिया था कि इस तरह का सत्र बुलाना ‘‘स्पष्ट रूप से अवैध, विधायिका की स्वीकृत प्रक्रियाओं और संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘चूंकि बजट सत्र समाप्त हो गया है, ऐसे में किसी भी विस्तारित सत्र को अवैध ठहराया जाना निश्चित है तथा ऐसे किसी भी सत्र के दौरान किया गया कोई भी विधायी कार्य गैरकानूनी और प्रारंभ से ही अमान्य होगा।’’
उन्होंने लिखा है, ‘‘इन पत्राचारों के बावजूद, ऐसा प्रतीत होता है कि सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है। इन कारणों से मैं उपरोक्त विधेयकों पर अपनी मंजूरी रोक रहा हूं।’’
राज्यपाल ने कहा कि यदि विधानसभा सत्र आयोजित करने की सरकार की इच्छा है, तो पारित किये जाने वाले विधेयकों सहित विशिष्ट विधायी कार्यों से संबंधित एक एजेंडा या कार्यक्रम तैयार किया जाए और इसके लिए मानसून या शीतकालीन सत्र बुलाया जाए।
पुरोहित ने लिखा, ‘‘(मान) सरकार के स्पष्ट रूप से अवैध सत्र को जारी रखने की स्थिति में, मैं राष्ट्रपति को मामले की रिपोर्ट करने सहित उचित कार्रवाई पर विचार करने के लिए मजबूर हो जाऊंगा।’’
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जोर देकर कहा था कि सत्र ‘पूरी तरह से वैध’ है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि कई ‘जन-समर्थक’ विधेयक सदन में पेश किये जाएंगे।
शुक्रवार से शुरू होने वाला सत्र एसवाईएल मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय द्वारा चार अक्टूबर को जारी दिशानिर्देश के बाद उत्पन्न राजनीतिक विवाद के बीच आहूत किया गया है। न्यायालय ने केंद्र को पंजाब में भूमि के उस हिस्से का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था, जिसे नहर निर्माण के लिए राज्य के हिस्से के तौर पर आवंटित किया गया था।
इस साल यह दूसरी बार है जब विधानसभा की बैठक बुलाने को लेकर आप सरकार और राजभवन के बीच विवाद खड़ा हो गया है।
राजभवन ने पहले 19-20 जून की विशेष बैठक को ‘पूरी तरह से अवैध’ बताया था।
पंजाब में राजभवन और आप सरकार के बीच अतीत में विभिन्न मुद्दों पर टकराव होता रहा है।
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