देश की खबरें | कठुआ बलात्कार, हत्या मामले के आरोपी शुभम सांगरा के खिलाफ पंजाब में मुकदमा चलने का रास्ता साफ

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श्रीनगर, 10 मई कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या कांड के आरोपी शुभम सांगरा को उच्चतम न्यायालय द्वारा वयस्क घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ पंजाब की अदालत में मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।

गौरतलब है कि 2018 के इस मामले में आरोपी सांगरा को उच्चतम न्यायालय ने नवंबर, 2022 में वयस्क करार दिया था।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बंजारों की आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें सांगरा भी शामिल है।

उच्चतम न्यायालय ने उसके 16 नवंबर, 2022 के आदेश से उत्पन्न एक याचिका का 24 अप्रैल को निपटारा कर दिया और निर्देश दिया कि सांगरा के खिलाफ कठुआ के सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित मुकदमा अब पंजाब के पठोनकोट जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में चलाया जाए।

कठुआ की अदालत उच्चतम न्यायालय के फैसले के आलोक में मामले के अंतिम निपटारे के लिहाज से 23 मई को सुनवाई करने वाली थी।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय के 2018 के आदेश के आधार पर मुकदमे की सुनवाई पठानकोट में होने की संभावना थी, लेकिन अपराध शाखा ने सांगरा के खिलाफ हत्या, बलात्कार, अपहरण और गलत तरीके से बंधक बनाने सहित विभिन्न धाराओं के तहत कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोप-पत्र दायर किया था।

कठुआ की अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 23 मई तय की है। अपराध शाखा उच्चतम न्यायालय के आदेश से अदालत को अवगत कराएगी।

वहीं, सांगरा को वयस्क करार देने वाला उच्चतम न्यायालय का नवंबर 2022 का आदेश अपराध शाखा के पास पहुंचने के बाद आरोपी को ‘बाल सुधार गृह’ से कठुआ जेल भेजा गया।

अपराध शाखा के आरोप-पत्र में इस क्रूर अपराध में सांगरा की कथित भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया है। आरोप-पत्र के अनुसार, सांगरा ने बच्ची को जबरन बेहोशी की दवा का ‘ओवरडोज’ दिया, ताकि वह ‘अचेत’ हो जाए और अपने साथ होने वाली बलात्कार और हत्या का विरोध करने में सक्षम न हो।

आरोप-पत्र के अनुसार, एक मेडिकल विशेषज्ञ ने कहा है, ‘‘ग्यारह जनवरी, 2018 को पीड़िता को जबरदस्ती 0.5 एमजी क्लोनाजेपाम की पांच गोलियां दी गईं, जो सुरक्षित चिकित्सकीय खुराक से बहुत ज्यादा है। उसके बाद उसे और गोलियां दी गईं... ओवरडोज के लक्षणों और संकेतों में अर्द्धमूर्छा, भ्रम, अंगों के समन्वय में परेशानी, सजगता खत्म हो जाना या बहुत कम हो जाना, सांसें बहुत धीमी चलना या उनका रुक जाना, बेहोशी और मौत शामिल हैं।’’

विशेषज्ञ के निष्कर्ष के अनुसार, क्लोनाजेपाम की गोलियां खाने और उसके शरीर में घुल जाने के करीब 60 से 90 मिनट बाद रक्त में उसका सांद्रण सबसे ज्यादा होता है, ‘‘फिर चाहे गोलियां भोजन के साथ दी गई हों या भोजन के बगैर।’’

चिकित्सकों का मानना है कि बच्ची को दी गई गोलियों के कारण यह सदमे में होगी या अचेतन की अवस्था में चली गयी होगी।

अपराध शाखा ने मौजूदा कानूनों और नियमों के आधार पर सांगरा के कठुआ सुधार गृह में बंद रहते हुए उसके खिलाफ शिकायत दायर की थी।

विभिन्न अदालतों में याचिका दायर कर रहा सांगरा उस वक्त पकड़ में आया जब उसके जन्म प्रमाणपत्र से जुड़ा एक आवेदन सामने आया और सभी को पता चला कि वह स्वयं को नाबालिग दिखाने का प्रयास कर रहा है।

सांगरा के खिलाफ सामूहिक बलात्कार, हत्या का मुकदमा चलने का रास्ता साफ होने के साथ ही आठ साल की बच्ची के लिए न्याय मांगने की यह प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।

तारीखों में असमानता और सांगरा के पिता द्वारा 15 अप्रैल, 2004 को जन्म प्रमाणपत्र में भरी गई झूठी जानकारी ने उनकी झूठ का पर्दाफाश कर दिया।

अदालत के समक्ष दायर हलफनामे में सांगरा के नाबालिग होने के दावे को साबित करने के लिए दिए गए आवेदन की असमानताओं के बारे में बताया गया। अपराध शाखा ने इन सूचनाओं, हलफनामे के साथ-साथ मेडिकल कारणों की जानकारी भी अदालत को सौंपी। अपराध शाखा सांगरा को नाबालिग मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करने के निचली अदालत के फैसले का विरोध कर रही थी।

हलफनामे में कहा गया है, सांगरा के पिता ने जम्मू के हीरानगर में तहसीलदार के कार्यालय में अपने तीनों बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन दिया था। पुलिस ने बताया कि सबसे बड़े बेटे की जन्मतिथि 23 नवंबर, 1997, बेटी की जन्मतिथि 21 फरवरी, 1998 और शुभम सांगरा की 23 अक्टूबर, 2002 लिखी हुई है। हलफनामे में कहा गया है, दो बड़े बच्चों के जन्म में महज दो महीने 28 दिनों का फर्क है ‘‘जो किसी भी मेडिकल लिहाज से संभव नहीं है।’’

अधिकारियों ने बताया, ‘‘इतना ही नहीं, दोनों बड़े बच्चों के लिए जन्मस्थान का जिक्र नहीं है, जबकि सांगरा के लिए कहा गया है कि उसका जन्म हीरानगर अस्पताल में हुआ है, लेकिन जांच के दौरान इसकी पुष्टि नहीं हुई।’’

उन्होंने कहा, बारीकी से की गई छानबीन के आधार पर हलफनामा तैयार किया गया है और उसके साथ मेडिकन विशेषज्ञों के बोर्ड की रिपोर्ट भी संलग्न है, जिसके अनुसार वारदात के दिन अर्थात 10 जनवरी, 2018 को सांगरा की उम्र ‘‘19 साल से 23 साल के बीच थी।’’

उच्चतम न्यायालय के सात मई, 2018 के आदेश के बाद मामले को जम्मू-कश्मीर से पठानकोट स्थानांतरित कर दिया गया था।

विशेष अदालत ने 10 जून, 2019 को तीन लोगों- मामले के मुख्य साजिशकर्ता व वारदात वाली जगह देवस्थान (मंदिर) की देखरेख करने वाले सांजी राम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और नागरिक परवेश कुमार- को ‘अंतिम सांस तक’ उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अदालत ने तीन अन्य आरोपियों- उपनिरीक्षक आनंद दत्ता, हेडकांस्टेबल तिलक राज और विशेष पुलिस अधिकारी सुरेन्द्र वर्मा को अपराध पर पर्दा डालने के इरादे से साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया और उन्हें पांच-पांच साल कैद तथा 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फिलहाल तीनों पैरोल पर जेल से बाहर हैं।

सातवां आरोपी विशाल जांगोत्रा (सांजी राम का पुत्र) बरी हो गया था।

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