देश की खबरें | सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और उर्वरक कंपनियां तीन और नैनो यूरिया संयंत्र स्थापित करेंगे: सरकार
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नयी दिल्ली, 29 जुलाई सरकार ने मंगलवार को कहा कि निजी और सार्वजनिक उर्वरक कंपनियों द्वारा प्रतिवर्ष 17 करोड़ बोतलों की कुल उत्पादन क्षमता वाले तीन और नैनो उर्वरक संयंत्र स्थापित किए जाएँगे।
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में अपने लिखित उत्तर में कहा कि सरकार देश भर में नैनो उर्वरक संयंत्रों की स्थापना में सीधे तौर पर शामिल नहीं है।
कुल मिलाकर, उर्वरक कंपनियों द्वारा सात नैनो-यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी वर्तमान में परिचालन में कुल उत्पादन क्षमता 27.22 करोड़ बोतलें (प्रत्येक 500 मिलीलीटर) प्रतिवर्ष है।
इसके अलावा, उर्वरक कंपनियों द्वारा तीन नैनो डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इन सभी नैनो डीएपी संयंत्रों की वर्तमान में कुल उत्पादन क्षमता 7.64 करोड़ बोतलें (प्रत्येक 500 मिली) प्रतिवर्ष की है।
इसके अलावा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य उर्वरक कंपनियों ने 3 और नैनो उर्वरक संयंत्र स्थापित करने की सूचना दी है, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 17 करोड़ बोतलें (500 मिली समतुल्य) प्रति वर्ष है।’’
मंत्री ने कहा कि स्थापना के बाद से, उर्वरक कंपनियों ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों सहित देश के सभी क्षेत्रों में नैनो यूरिया की 10.68 करोड़ बोतलें (प्रत्येक 500 मिली) और नैनो डीएपी की 2.75 करोड़ बोतलें (प्रत्येक 500 मिली) बेची हैं।
मंत्री ने नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला और कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न मंचों पर नैनो उर्वरकों के उपयोग पर राज्यों के साथ बातचीत कर रही है।
नैनो-यूरिया और नैनो-डीएपी कंपनियों द्वारा प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) पर उपलब्ध कराए जाते हैं। उर्वरक विभाग द्वारा नियमित रूप से जारी मासिक आपूर्ति योजना में नैनो-यूरिया को शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने उर्वरक कंपनियों के सहयोग से देश के सभी 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में परामर्श और क्षेत्र-स्तरीय प्रदर्शनों के माध्यम से नैनो डीएपी को अपनाने के लिए एक महाअभियान शुरू किया है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, मंत्रालय ने उर्वरक कंपनियों के सहयोग से देश के 100 जिलों में नैनो-यूरिया प्लस के क्षेत्र-स्तरीय प्रदर्शनों और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए अभियान भी शुरू किए हैं।
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