जरुरी जानकारी | पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रखा बिक्री लक्ष्य
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नयी दिल्ली, 16 अप्रैल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सरकार की तरफ से संचालित सूक्ष्म बीमा योजनाओं पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई की बिक्री के लिए चालू वित्त वर्ष का एक लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके साथ ही सार्वजनिक बैंकों ने मुद्रा योजना और स्टैंडअप इंडिया योजना जैसे वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों के लिए भी अपने लक्ष्य तय किए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से कहा है कि वे ग्राहकों को कई वर्ष वाली योजनाएं खरीदने के लिए प्रोत्साहित करें। फिलहाल अधिकतर ग्राहक एक साल की अवधि वाली योजना ही खरीदते हैं और फिर हर साल उनका नवीनीकरण कराते हैं।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के तहत करीब 8.3 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत करीब 23.9 करोड़ लाभार्थी हैं। वर्ष 2015 में इन बीमा योजनाओं की शुरुआत के बाद से मार्च, 2023 तक पीएमजेजेबीवाई के तहत कुल 15.99 करोड़ पंजीकरण हुए हैं जबकि पीएमएसबीवाई के तहत 33.78 करोड़ लोग शामिल हुए हैं।
पिछले साल एक जून से वित्त मंत्रालय ने पीएमजेजेबीवाई के तहत प्रीमियम को 330 रुपये से बढ़ाकर 436 रुपये कर दिया था जबकि पीएमएसबीवाई के मामले में इसे 12 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया गया था। इन सूक्ष्म बीमा योजनाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और दावों की प्रतिपूर्ति को देखते हुए दरें संशोधित की गई थीं।
पीएमजेजेबीवाई के तहत 18-50 वर्ष की उम्र वाले खाताधारक की किसी भी स्थिति में मृत्यु होने पर उसके परिजनों को दो लाख रुपये दिए जाते हैं। वहीं पीएमएसबीवाई में दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता होने की स्थिति में दो लाख रुपये और आंशिक रूप से विकलांग होने पर बीमाधारक को एक लाख रुपये देने का प्रावधान करता है।
पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के साथ हुई बैठक में सूक्ष्म बीमा योजनाओं को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया था। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव विवेक जोशी ने इन बैंकों से निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए समयबद्ध प्रयास करने को कहा।
सरकार ने इन बीमा योजनाओं के प्रसार में आए ठहराव को दूर करने के लिए एक अप्रैल से एक अभियान शुरू किया है। तीन महीने तक चलने वाले इस अभियान में बैंकों को अपने बैंकिंग प्रतिनिधियों के नेटवर्क का अधिकतम लाभ उठाने का निर्देश दिया गया है।
प्रेम
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