देश की खबरें | कोविड-19 के ठीक हुए मरीजों से प्लाज्मा लेने संबंधी जनहित याचिका को अभिवेदन माना जाए: उच्च न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का आग्रह किया गया था कि वे कोविड-19 के ठीक हुए मरीजों से घर पर या अस्पताल में प्लाज्मा लिए जाने को अनिवार्य बनाएं।
नयी दिल्ली, तीन जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का आग्रह किया गया था कि वे कोविड-19 के ठीक हुए मरीजों से घर पर या अस्पताल में प्लाज्मा लिए जाने को अनिवार्य बनाएं।
अदालत ने कहा कि इस जनहित याचिका को अभिवेदन के रूप में लिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि लोगों को कोविड-19 का उपचार प्राप्त करने से पहले प्लाज्मा दान का वचन देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता और यह स्वैच्छिक होना चाहिए।
अदालत ने प्रतिवादियों-केंद्र, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और विभिन्न निकाय इकाइयों से कहा कि वे जनहित याचिका को अभिवेदन के रूप में लें जिसमें प्लाज्मा की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तय किए जाने और एक संवैधानिक इकाई के गठन का आग्रह किया गया है।
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याचिका में दावा किया गया था कि कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए प्लाज्मा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के वास्ते केंद्र और दिलली सरकार की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
इसमें यह भी आग्रह किया गया था कि कोविड-19 के ठीक हुए प्रत्येक मरीज के लिए पहली बार में ही यह बाध्यकारी कर दिया जाना चाहिए कि वे प्लाज्मा दान करेंगे।
हालांकि, पीठ ने मत व्यक्त किया कि लोगों को प्लाज्मा दान के लिए विवश नहीं किया जा सकता।
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