देश की खबरें | सर्वर पर रैनसमवेयर हमले के बाद पीटीआई की सेवाएं बाधित

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के कंप्यूटर सर्वरों पर बड़े पैमाने पर रैनसमवेयर हमला किया गया, जिससे संचालन और पूरे भारत में सैकड़ों ग्राहकों को समाचार भेजने का काम कुछ घंटों तक बाधित रहा। कंपनी के एक प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि इंजीनियरों ने रात भर में हालांकि सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के कंप्यूटर सर्वरों पर बड़े पैमाने पर रैनसमवेयर हमला किया गया, जिससे संचालन और पूरे भारत में सैकड़ों ग्राहकों को समाचार भेजने का काम कुछ घंटों तक बाधित रहा। कंपनी के एक प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि इंजीनियरों ने रात भर में हालांकि सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया।

अपनी पहचान ‘लॉकबिट’ बताने वाले रैनसमवेयर का यह हमला शनिवार रात करीब 10 बजे हुआ और इसने भारत की प्रमुख समाचार एजेंसी के लगभग सभी सर्वरों को संक्रमित किया। वायरस ने सभी डाटा और अनुप्रयोगों को कूट रूप में बदल दिया, जिसकी वजह से पीटीआई के ग्राहकों को समाचार भेजने का काम रोक दिया गया। रैनसमवेयर ने एक कंप्यूटरस्क्रीन संदेश के जरिये बाधित की गई सेवाओं को बहाल करने के बदले फिरौती की मांग की थी।

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वायरस की उत्पत्ति कहां हुई, इसकी जानकारी नहीं है और फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह दुर्भावनापूर्ण और जानबूझकर किया गया हमला था या फिर बिना सोचे-समझे किया गया हमला। रैनसमवेयर एक वायरस है और इसे ऐसा इसलिये कहा जाता है क्योंकि यह पीड़ित कंप्यूटर या सर्वर को बंधक बनाकर उसे फिर से पुराने स्वरूप में बहाल करने या कूटबद्ध डाटा छोड़ने के बदले फिरौती की मांग करता है।

प्रवक्ता ने बताया कि पीटीआई के आईटी इंजीनियरों ने चरणबद्ध तरीके से सेवाओं को शुरू करने के लिये पूरी रात काम किया और रविवार सुबह नौ बजे तक लगभग सभी सेवाएं फिर से सामान्य रूप से चालू हो गईं। कोई फिरौती भी नहीं अदा की गई।

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साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली संस्था सोफोस द्वारा कराए गए एक हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, बीते कुछ सालों में दुनियाभर में रैनसमवेयर हमलों में इजाफा हुआ है, सर्वेक्षण में शामिल 82 प्रतिशत भारतीय कंपनियों ने कहा कि इस साल जनवरी से लेकर जून के बीच उन्हें ऐसे हमलों का सामना करना पड़ा।

इसमें कहा गया कि अपने आंकड़ों को कूट रूप में बदले जाने से पहले महज आठ प्रतिशत पीड़ित ही हमलों को रोक पाने में कामयाब रहे जबकि इस लिहाज से वैश्विक आंकड़ा 24 प्रतिशत का है।

सर्वेक्षण में शामिल एक तिहाई के करीब भारतीय ही बिना फिरौती का भुगतान किये अपने कूट रूप में बदले गए आंकड़ों को बैकअप से हासिल कर सके जबकि 66 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने अपने आंकड़ों को सुरक्षित पाने के लिये फिरौती दी।

सोफोस के विश्वव्यापी सर्वेक्षण में 26 देशों के 5000 आईटी प्रबंधकों को शामिल किया गया, जिसमें से 300 भारत में थे।

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