देश की खबरें | महत्वाकांक्षी ई-अदालत के तीसरे चरण के लिए केंद्रीय बजट में 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. देश में डिजिटल, ऑनलाइन और कागज रहित निचली अदालतें स्थापित करने की महत्वाकांक्षी ई-अदालत परियोजना के तीसरे चरण के लिए केंद्रीय बजट में 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

नयी दिल्ली, एक फरवरी देश में डिजिटल, ऑनलाइन और कागज रहित निचली अदालतें स्थापित करने की महत्वाकांक्षी ई-अदालत परियोजना के तीसरे चरण के लिए केंद्रीय बजट में 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

परियोजना के लिए धनराशि ‘ न्याय प्रदान करने एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन’ के तहत आवंटित की गई है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत भारतीय न्यायपालिका को सूचना एवं प्रौद्योगिकी के लिहाज से सक्षम बनाने के लिए ई-अदालत परियोजना 2007 से ही क्रियान्वित की जा रही है। परियोजना का दूसरा चरण 2023 में समाप्त हुआ।

ई-अदालत परियोजना का तीसरा चरण 2023 से शुरू हुआ। इसका उद्देश्य पुराने रिकॉर्ड सहित अदालत के संपूर्ण रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के माध्यम से डिजिटल, ऑनलाइन और कागज रहित अदालतों की ओर बढ़ते हुए अधिक सुलभ न्याय व्यवस्था की शुरुआत करना है।

तीसरे चरण का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका के लिए एक एकीकृत प्रौद्योगिकी मंच बनाना है जो अदालतों, वादियों और अन्य हितधारकों के बीच एक सहज और कागज रहित ‘इंटरफेस’ प्रदान करेगा।

सरकार ने कहा कि जिन नागरिकों के पास प्रौद्योगिकी तक पहुंच नहीं है, वे ई-सेवा केंद्रों से न्यायिक सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जिससे डिजिटल विभाजन को कम किया जा सकेगा। अदालत के अभिलेखों का डिजिटलीकरण कागज-आधारित मुकदमेबाजी कम करके और दस्तावेजों के रख रखाव को कम करके प्रक्रियाओं को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने में सक्षम बनाता है।

इसके अलावा, अदालती कार्यवाही में डिजिटल भागीदारी से इन कार्यवाहियों से जुड़ी लागतों को कम किया जा सकता है, जैसे गवाहों, न्यायाधीशों और अन्य हितधारकों के लिए यात्रा व्यय, जबकि अदालती शुल्क, जुर्माना और दंड का भुगतान कहीं से भी, कभी भी किया जा सकता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\