देश की खबरें | सिलक्यारा सुरंग में आपात स्थिति से बचाव के लिए एक अलग दीवार का प्रावधान : सरकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में भागने के लिए अलग सुरंग क्यों नहीं थी, इस पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि सुरंग में एक अलग दीवार का प्रावधान किया गया है, जिसमें नियमित अंतराल पर निकास द्वार हैं।

नयी दिल्ली, छह दिसंबर उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में भागने के लिए अलग सुरंग क्यों नहीं थी, इस पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि सुरंग में एक अलग दीवार का प्रावधान किया गया है, जिसमें नियमित अंतराल पर निकास द्वार हैं।

पिछले महीने 12 तारीख से सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को 28 नवंबर को बचाया गया था।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया, ‘‘धरासू-यमुनोत्री राजमार्ग (एनएच-134) पर सिलक्यारा द्वि-दिशात्मक सुरंग में वाहनों के क्रॉसओवर के लिए 565 मीटर के औसत अंतराल पर और आपात स्थिति के दौरान पैदल यात्रियों के लिए 300 मीटर के औसत अंतराल पर निकास द्वार खोलने के साथ पृथक दीवार का प्रावधान किया गया है...।’’

गडकरी से पूछा गया था कि क्या सरकार ने इस बात की जांच की है कि नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एनईसीएल) ने बचाव मार्ग का निर्माण क्यों नहीं किया, जैसा कि सुरंग निर्माण में नियम है।

राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) हैदराबाद स्थित नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के माध्यम से सुरंग का निर्माण कर रहा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने 2019 में सुरंग के ढहने के बाद सुरक्षा मानदंडों की समीक्षा की थी, मंत्री ने कहा कि धरासू-यमुनोत्री राजमार्ग (एनएच -134) पर सिलक्यारा सुरंग इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मोड के तहत बनाई जा रही है, जिसमें डिजाइन की जिम्मेदारी ईपीसी ठेकेदार की है।

उन्होंने कहा, ‘‘2019 में निर्माण के दौरान मामूली दरारों का सामना करने के बाद, वास्तविक जमीनी व्यवहार के आधार पर समय-समय पर निर्माण अनुक्रमों और प्राथमिक समर्थन प्रणाली की समीक्षा की जाती है और परियोजना के लिए लगे प्राधिकरण के इंजीनियर द्वारा अनुमोदित किया जाता है, जिसे एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों की देखरेख में निष्पादित किया जाता है।’’

मंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन पर उच्चतम न्यायालय ने 2021 में चार धाम परियोजना के तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण तीन राष्ट्रीय राजमार्गों ऋषिकेश-माना (एनएच-7), ऋषिकेश-गंगोत्री (एनएच-34) और टनकपुर-पिथौरागढ़ (एनएच-9) को दो लेन का बनाने की अनुमति दी थी।

उत्तराखंड में 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा सुरंग परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड में चार पवित्र स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के लिए संपर्क में सुधार करना है।

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